अजब बिजली विभाग के गजब कारनामे! बिना मीटर लगाए थमा दिया ₹1638 का बिल, ‘मिठाई-पानी’ न देने पर उपभोक्ता को बनाया प्रताड़ित!
गोविन्दगढ़/अलवर : राजस्थान में भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच अलवर जिले के गोविन्दगढ़ से जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) की एक ऐसी अंधेरगर्दी सामने आई है, जिसे सुनकर आप भी अपना सिर पकड़ लेंगे। मामला गोविन्दगढ़ के ग्राम मुंडपूरीखुर्द का है, जहां विभाग ने एक उपभोक्ता को बिना मीटर लगाए और बिना एक यूनिट बिजली की सप्लाई दिए ही ₹1638 का तगड़ा बिल थमा दिया है!
फीस जमा, पर मीटर गायब; चक्कर काट-काटकर उपभोक्ता परेशान
शिकायत पत्र के अनुसार, स्थानीय निवासी प्रकाश सैनी (पुत्र तुलसी राम सैनी) ने बीते समय 14 मई 2026 को घरेलू बिजली के नए कनेक्शन के लिए बकायदा आवेदन किया था। नियम के मुताबिक उसी तारीख को डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) के जरिए पूरी फीस भी जमा कर दी गई थी। लेकिन दो महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी पीड़ित के घर पर मीटर का एक पुर्जा तक नहीं पहुंचा।
‘मिठाई-पानी’ का खेल: पैसे नहीं तो काम नहीं!
शिकायत में बिजली विभाग के स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित का कहना है कि 14 मई से लेकर अब तक उसने बिजली दफ्तर के अनगिनत चक्कर काटे, लेकिन हर बार काम करने के एवज में ‘मिठाई-पानी’ (रिश्वत) की मांग की गई। जब उपभोक्ता ने ईमानदारी दिखाते हुए रिश्वत देने से मना कर दिया, तो उसे ‘आज-कल’ का बहाना बनाकर महीनों तक दौड़ाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
हद हो गई! न तार जुड़ा, न मीटर लगा… पर आ गया ₹1638 का बिल
विभागीय लापरवाही और तानाशाही की पराकाष्ठा तब देखने को मिली, जब विभाग ने मीटर तो नहीं लगाया, लेकिन पीड़ित के हाथ में ₹1638 का बिजली बिल थमा दिया। सवाल यह उठता है कि जब परिसर में न तो मीटर लगा है और न ही बिजली चालू हुई है, तो यह ₹1638 का आंकड़ा किस ‘जादुई’ मीटर से रीड़ किया गया? क्या यह सीधे तौर पर जनता की जेब पर डाका डालने और वित्तीय अनियमितता का बड़ा सबूत नहीं है?
मुख्यमंत्री और विधायक तक पहुंचा मामला, कार्रवाई की मांग
इस खुली लूट और उत्पीड़न से तंग आकर पीड़ित उपभोक्ता ने अब माननीय मुख्यमंत्री महोदय और क्षेत्रीय विधायक को शिकायत पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। पत्र में मांग की गई है कि:
– इस फर्जी और अवैध रूप से जारी किए गए ₹1638 के बिल को तुरंत निरस्त किया जाए।
- ‘मिठाई-पानी’ के नाम पर रिश्वत मांगने वाले गोविन्दगढ़ कार्यालय के भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच बिठाकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
– पीड़ित के घर अविलंब नया मीटर स्थापित कर बिजली चालू की जाए।
सवाल:
क्या सरकार की नाक के नीचे चल रहे इस ‘मिठाई-पानी’ के खेल पर उच्चाधिकारी संज्ञान लेंगे? या फिर एक आम उपभोक्ता इसी तरह सरकारी दफ्तरों और फर्जी बिलों के बोझ तले पिसता रहेगा?

