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ढाई साल के बच्चे के गले में फंसी सेफ्टी पिन:कोटा के डॉक्टर्स ने सर्जरी कर निकाली, मासूम की नाक में ब्लड जमा हो गया था

बूंदी जिले के नैनवां में एक ढाई साल के मासूम खेलते समय एक खुली सेफ्टी पिन निगल गया। पिन नाक और गले के जोड़ (एडिनॉइड) वाले बेहद संवेदनशील हिस्से में जाकर फंस गई। करीब 24 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जूझे मासूम को आखिरकार कोटा के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल एंडोस्कोपिक सर्जरी के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला। घटना 20 जुलाई (सोमवार) शाम की है। परिजन मासूम को तुरंत नैनवा अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए बूंदी या कोटा ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन 21 जुलाई को बच्चे को बूंदी ले गए, लेकिन वहां जटिलता के कारण पिन नहीं निकाली जा सकी। नाक में काफी ब्लड जमा हो गया 21 जुलाई को दोपहर 2 बजे परिजन बच्चे को गंभीर हालत में कोटा एमबीएस अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉ. शेमेन्द्र कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बच्चा जब कोटा लाया गया, तो उसकी स्थिति काफी नाजुक थी। पिन नाक के ठीक पीछे एडिनॉइड वाले हिस्से में फंसी हुई थी। यह वह जगह है जहां दिमाग और गले का मिलता। जब एंडोस्कोपी शुरू की, तो नाक के भीतर काफी खून जमा हुआ था, जिससे अंदर कुछ भी साफ नजर नहीं आ रहा था। पिन पूरी तरह खुली हुई थी, जिससे बच्चे के गले या आसपास की रक्त वाहिकाओं में गंभीर घाव (ट्रॉमा) होने का पूरा खतरा था। हमने सबसे पहले सक्शन मशीन से खून को साफ किया और रास्ता बनाया। इसके बाद बेहद सावधानी के साथ शाम 6 बजे पिन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है। डॉक्टर्स की अपील, नुकीली चीजों से बच्चों को रखें दूर घटना के बाद डॉ. शेमेन्द्र कुमार ने छोटे और बड़े बच्चों के माता-पिता के लिए एक सलाह भी दी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की पहुंच से सेफ्टी पिन, सुई, मटर या मूंगफली का दाना, मोती, गेहूं, रबर के टुकड़े, चने जैसी चीजें हमेशा दूर रखें। छोटे बच्चों को खेल-खेल में मुंह या नाक में सामान डालने की आदत होती है, इसलिए खाते या खेलते समय उन पर कड़ी नजर रखें। बच्चा अचानक तेजी से खांसने लगे, सांस लेने में तकलीफ हो या गले में कुछ फंसने की शिकायत करे, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं। एंडोस्कोपिक तकनीक से पिट्यूटरी ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी मेडिकल कॉलेज कोटा के न्यूरोसर्जरी विभाग ने मस्तिष्क सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए छबड़ा जिले के नयागांव निवासी 31 साल की लता बाई को नया जीवन दिया है। मरीज पिछले लगभग छह माह से लगातार सिरदर्द तथा पिछले दो माह से बाईं आंख से कम दिखाई देने की समस्या से परेशान थीं। स्थानीय स्तर पर उपचार कराने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। मेडिकल कॉलेज कोटा के न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती होने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सभी आवश्यक जांचें कराईं। एमआरआई सहित अन्य जांचों में पिट्यूटरी ग्रंथि में बड़ा ट्यूमर पाया गया। वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. एस. एन. गौतम के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने एंडोस्कोपिक ट्रांसनेज़ल सर्जरी करने का निर्णय लिया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर है। लंबे समय से चली आ रही सिरदर्द की समस्या में राहत मिली है।

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