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बस मालिक ने खुद पर डाला डीजल,आग लगाने की कोशिश:कहा- जुर्माना देने को तैयार, अफसरों ने नहीं सुनी; जयपुर में सिंधीकैंप पर RTO की कार्रवाई

जयपुर में आरटीओ की कार्रवाई से नाराज बस मालिक ने खुद पर डीजल डाल लिया। इसके बाद माचिस लेकर आग लगाने की कोशिश भी की। यह घटना सिंधीकैंप बस स्टैंड के सामने रविवार शाम करीब 5 बजे हुई। स्लीपर बसों के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई के लिए आरटीओ सिंधीकैंप बस अड्‌डे के बाहर पहुंचे थे। यहां ग्वालियर रूट की एक बस को आरटीओ की उड़नदस्ता टीम ने नियमों का हवाला देते हुए जब्त करने के लिए कहा तो मालिक हाकिम सिंह चौधरी ने पहले चालान जमा करने के लिए कहा। हाकिम सिंह ने कहा- मैंने अफसरों से कहा कि मुझे सवारी लेकर जाना है और अगर कोई कमी है तो चालान कर दें, लेकिन बस जब्त नहीं करें। मैंने अधिकारियों से हाथ जोड़कर और पैर पकड़कर भी गुहार लगाई, लेकिन मेरी बात नहीं सुनी। इसके बाद बस से डीजल निकालते हुए खुद पर डाल लिया। फिर आग लगाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों ने हाकिम सिंह को रोक लिया। घटना के बाद धौलपुर निवासी हाकिम सिंह चौधरी से भास्कर टीम ने बात की। हाकिम सिंह रोते हुए बोले- मेरी उम्र 61 साल है। मैं हार्ट का मरीज हूं। हर महीने दवाइयों पर 18 से 20 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसी वजह से मैं अपनी ही बस में कंडक्टर का काम करता हूं, ताकि किसी दूसरे कर्मचारी की तनख्वाह न देनी पड़े। पहले देखें विवाद की PHOTOS बस मालिक बोला- मकान गिरवी, अपनी बस में बनता हूं कंडक्टर हाकिम सिंह चौधरी ने बताया- मैं अपनी बस लेकर सिंधी कैंप पहुंचा था। इसी दौरान आरटीओ उड़नदस्ता टीम ने बस की जांच की। इसके बाद नियमों का हवाला देते हुए बस जब्त करने के लिए कहा। हाकिम ने बताया- मेरा मकान गिरवी रखा है। मुझ पर करीब 25 लाख रुपए का कर्ज है। मेरे पास दो बसें हैं। दोनों बसें फाइनेंस पर हैं, जिनकी हर महीने किस्त चुकानी पड़ती है। अगर बसें नहीं चलेंगी तो किस्त, दवाइयों और घर का खर्च कैसे चलेगा। ‘कल 12 हजार की रसीद कटवाई, आज भी 15 हजार देने को तैयार था’ हाकिम सिंह ने बताया- मैं 30 साल से जयपुर-आगरा और जयपुर-ग्वालियर रूट पर बस चला रहा हूं। उन्होंने बताया- मैं राजस्थान सरकार को 50 हजार रुपए टैक्स देता हूं। उसकी रसीदें भी मेरे पास हैं। उन्होंने कहा- एक दिन पहले ही 18 जुलाई को मैंने 12 हजार रुपए की रसीद कटवाई थी। आज भी मैं 15 हजार रुपए तक की रसीद कटवाने को तैयार था, लेकिन अधिकारियों ने मेरी बात नहीं सुनी। उन्होंने बताया- आरटीओ इंस्पेक्टर ने आते ही कहा- 1.20 लाख रुपए जुर्माना जमा कराओ, नहीं तो बस सीज कर देंगे। हाकिम ने बताया- मैंने अफसरों से कहा कि मेरी गाड़ी बंद कर देंगे तो मेरी दवा कैसे आएगी, घर कैसे चलेगा। इससे अच्छा तो मैं खुद को खत्म कर लूं। इसी परेशानी में मैंने खुद पर डीजल डाल लिया। बस में कोई बड़ी कमी नहीं है हाकिम सिंह ने कहा- मेरी बस सभी जरूरी मानकों के अनुसार चल रही है। यदि कोई छोटी-मोटी कमी है तो उसे भी तुरंत ठीक कराने के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा- बस में ऐसी कोई बड़ी खामी नहीं थी, जिसके कारण उसे जब्त किया जाए। पहले कंडक्टर था, मेहनत से खरीदी बस हाकिम सिंह ने बताया- मैंने करियर की शुरुआत कंडक्टर के रूप में की थी। कई साल मेहनत करने के बाद पैसे जोड़कर पहली बस खरीदी। अब उम्र बढ़ने और बीमारी के बावजूद मैं खुद बस में कंडक्टर का काम करता हूं, ताकि परिवार और कर्ज की जिम्मेदारियां पूरी कर सकें। उन्होंने बताया- मेरे दो बेटे हैं, जो प्राइवेट नौकरी करते हैं। अपने-अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में बस ही मेरी आय का मुख्य साधन है। आरटीओ की कार्रवाई को लेकर उठे सवाल स्लीपर बसों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर पहले भी बस ऑपरेटर विरोध जता चुके हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं घटना के बाद सिंधीकैंप बस स्टैंड के बाहर वनस्थली मार्ग पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और आरटीओ अधिकारियों पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। आरटीओ बोले- कार्रवाई से बचने के लिए मालिक ने यह किया जयपुर आरटीओ प्रथम चंपालाल जीणगर ने बताया- हाईकोर्ट के आदेश की पालना के लिए आरटीओ की फ्लाइंग ड्यूटी पर थी। इसी दौरान UP नंबर की बस सिंधीकैंप पर रुकी, जो बस बॉडी कोड के अनुरूप नहीं थी। इसे लेकर ही आरटीओ इंस्पेक्टर जयंत ने जुर्माना लगाने की बात कही। इस पर बस कंडक्टर-मैनेजर ने आग लगाने की कोशिश की। यह पूरा मामला कार्रवाई से बचने के लिए है।

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