बेगू का बास के युवक की आबूधाबी में संदिग्ध हालत में मौत, 3 माह बाद मिला शव, परिजन हुए आक्रोशित
गांव बेगू का बास के युवक की आबू धाबी में तीन माह पूर्व हुई मौत के बाद शुक्रवार को शव गांव लाए। प्रत्येक ग्रामीण राकेश कुमार (24) की मौत को लेकर स्तब्ध था। शव तीन माह बाद पहुंचने पर ग्रामीणों ने विदेश मंत्रालय के प्रति आक्रोश जताया। परिजन व ग्रामीण बोले कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और विदेश मंत्रालय समय रहते सहयोग करते तो शव पहले पहुंच सकता था। मौत के कारणों व पीड़ित परिवार को मुआवजा मिल सकता था। अशोक ने बताया कि उसके ताऊ का बेटा राकेश पुत्र दलीप चंद मेघवाल आबू धाबी की एसीसी कंपनी में 28 अगस्त, 2025 को लेबर के रूप में काम करने गया था। तीन माह पूर्व तक उससे परिजनों की फोन पर बातचीत होती थी, बाद में फोन बंद आने लगा तो चिंता बढ़ गई। कंपनी में पता करने पर जानकारी नहीं मिली तो दुबई में कार्यरत रिश्तेदार को भेजकर पता कराया तो 18 मई को जानकारी मिली कि राकेश की 22 अप्रैल को ही मौत हो गई थी। परिजनों ने कंपनी में बार-बार संपर्क किया और विदेश मंत्रालय एवं जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया, परंतु तीन माह तक यथासंभव सहयोग नहीं मिला। सांसद राहुल कस्वां से मिलने पर उन्होंने भी आश्वासन दिया, परंतु समय पर कार्रवाई नहीं हुई। बाद में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल व कैबीनेट मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलकर गुहार की गई, तो उन्होंने विदेश मंत्रालय में फोन किया, तब जाकर डेडबॉडी मिल सकी। परिवार में वही कमाने वाला था। मृतक के पिता ईंट भट्ठे पर काम करते हैं। दो भाई-बहनों वह छोटा और अविवाहित था। इधर, प्रशासक विनोद कुमार मीणा, परिजनों व ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच व पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है। आबू धाबी में साथ काम करने वाला रतनगढ़ निवासी कपिल रैगर जब राकेश की डेडबॉडी लेकर घर पहुंचा तो सारी बात बताई। कपिल ने बताया कि वह और राकेश एक ही कंपनी में काम करते थे और साथ ही रहते थे। राकेश लगातार एक-दो दिन तक कमरे पर नहीं लौटा तो उन्होंने कंपनी अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इस पर अधिकारियों का जवाब बहुत ही असंवेदनशील था। बाद में राकेश की मृत्यु की सूचना मिली और उसने कई बार कंपनी से मौत का कारण जानने का प्रयास किया, लेकिन जानकारी देने से इनकार कर दिया।

