'मल्लिका' आम ने बदली किस्मत, हर साल लाखों की कमाई:प्राइवेट नौकरी छोड़कर शुरू की बागवानी; इनोवेशन के लिए मिला सम्मान
इलेक्ट्रिकल में पॉलिटेक्निक डिप्लोमा करने के बाद चार साल प्राइवेट कंपनियों में नौकरी की। सैलरी ज्यादा नहीं थी और परिवार से भी दूर रहना पड़ता था। पिता की तबीयत खराब होने पर भी नौकरी की वजह से समय पर घर नहीं पहुंच पाते थे। ऐसे में नौकरी छोड़कर खेती करने का फैसला किया। काफी रिसर्च के बाद 7 साल पहले दो बीघा जमीन में आम की ‘मल्लिका’ वैरायटी के पौधे लगाए। चार महीने तक फल देने वाली इस वैरायटी से अब हर साल लगातार मुनाफा बढ़ रहा है। म्हारे देश की खेती में आज बात चित्तौड़गढ़ के किसान की… पारंपरिक फसल छोड़कर बागवानी को चुना
कन्हैयालाल धाकड़ (37) चित्तौड़गढ़ जिले की निंबाहेड़ा तहसील के भैरूखेड़ा गांव के किसान हैं। खेती में कुछ नया करने की इच्छा से उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय बागवानी को चुना। साल 2025 में पिता मोहनलाल धाकड़ का निधन हो गया, लेकिन उनकी प्रेरणा आज भी परिवार के साथ है। मां धापूबाई, पत्नी ममता, बेटा चंद्रप्रकाश और अन्य भाई बागवानी में पूरा सहयोग करते हैं। चार भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे कन्हैयालाल को साल 2025 में उदयपुर में इनोवेटिव फार्मर के रूप में सम्मानित भी किया गया। आंध्र प्रदेश से मंगवाए 270 पौधे कन्हैयालाल धाकड़ ने बताया- साल 2017 में उदयपुर में नौकरी करते समय पिता की तबीयत खराब हुई। नौकरी के कारण घर नहीं आ पा रहा था तो सबकुछ छोड़कर वापस आ गया। भैरूखेड़ा गांव में खेती करना शुरू कर दिया। पिता के सहयोग से दो बीघा में आम का बगीचा लगाने का प्लान किया। काफी रिसर्च के बाद आंध्र प्रदेश से 270 पौधे मंगवाए। जुलाई-अगस्त में डेढ़ से ढाई फीट गहरे गड्ढे तैयार कर उनमें गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट के साथ थोड़ी डीएपी और एसएसपी मिलाकर पौधे लगाए। पौधों के बीच 8×12 फीट या जरूरत के अनुसार दूरी रखी। सिंचाई के लिए मैंने कम खर्च वाला पारंपरिक तरीका अपनाया। शुरुआत में खराब मिट्टी के कारण कुछ पौधे खराब हुए, जिन्हें नए पौधों से बदल दिया गया। पहले साल पौधों पर आए फूल और छोटे फल हटा दिए, ताकि पेड़ मजबूत हो सकें। करीब पांच-छह साल बाद अच्छी पैदावार मिलने लगी और आज सभी पेड़ लगभग 15 फीट ऊंचे होकर भरपूर फल दे रहे हैं। आम से लगातार बढ़ रहा मुनाफा
चुनौतियों के बावजूद पौधे विकसित हुए और 2020 से उत्पादन शुरू हुआ, जो 10 क्विंटल से बढ़कर 2025 में लगभग 150 क्विंटल तक पहुंच गया। आम की मांग बढ़ने के साथ कीमतें भी बढ़ीं और अब उनकी सप्लाई चित्तौड़गढ़ के अलावा प्रतापगढ़, नीमच, उज्जैन और उदयपुर तक हो रही है। इस समय आम 100 से 120 रुपए किलो बिक रहे हैं, जबकि बड़े और अच्छी गुणवत्ता वाले फल 150 से 200 रुपए किलो तक बिक जाते हैं। साल 2025 में उन्हें करीब 1.40 लाख रुपए का शुद्ध लाभ हुआ, जबकि इस साल ढाई से तीन लाख रुपए तक मुनाफे की उम्मीद है। दूसरे किसानों के लिए भी बना सफल मॉडल कन्हैयालाल ने बताया- मल्लिका आम का स्वाद बेहद अच्छा होता है। इसकी गुठली छोटी, पल्प ज्यादा और यह लगभग रेशारहित होता है। यही वजह है कि इसे खाने के साथ-साथ अचार बनाने के लिए भी खूब पसंद किया जाता है। नीलम और दशहरी किस्मों को मिलाकर तैयार की गई इस हाइब्रिड वैरायटी में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। उनका मानना है कि नई तकनीक अपनाकर, नई किस्मों की जानकारी रखकर और बाजार की मांग को समझकर किसान कम जमीन से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। उनका बगीचा अब जिले के अन्य किसानों के लिए एक सफल और प्रेरणादायक मॉडल बन गया है। … खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… आम के 100 साल पुराने पेड़ों की कैरी का अचार:स्वाद ऐसा कि विदेशों तक है डिमांड, किसान को हर साल लाखों की कमाई बेहतर उत्पादन की उम्मीद में किसान नए-नए बीज और पौधों की वैरायटी की तलाश में रहते हैं। खराब बीज और पौधों से न केवल किसानों की उम्मीदें टूटती हैं, बल्कि नुकसान भी होता है। पूरी खबर पढ़िए

