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मध्यप्रदेश की बारिश ने भर दी परवन की झोली, तीनों एनीकटों पर चली चादर

सकतपुर| जिले में भले ही अच्छी बारिश का इंतजार बना हुआ है लेकिन मध्यप्रदेश की जोरदार बारिश से परवन और पार्वती नदी में पानी की अच्छी आवक हो गई है। परवन नदी का जलस्तर बढ़ने से शेरगढ़ पिकअप वियर के बाद शनिवार को बलदेवपुरा-गोरड़ी और मायथा एनीकट लबालब भर गए है। तीनों एनीकट के ओवरफ्लो होकर चादर चलने लगी ​है। इनमें शेरगढ़ पिकअप वियर से किसानों को नहरी तंत्र के जरिए सिंचाई का पानी मिलता है। जबकि मायथा से अडानी बिजली पावर प्लांट को पानी की आपूर्ति होती ​है। मायथा और बलदेवपुरा से किसान खेतों की सिंचाई भी करते है और भू जलस्तर में भी बढोत्तरी ​हुई ​है। बारां जिले में मानसून में 1 जून से 11 जुलाई तक औसतन 145 मिमी बारिश होती है। वहीं पिछले साल इस दौरान 527.93 मिमी बारिश होने से अधिकांश बांध व तालाब लबालब हो गए थे। वहीं इस साल 1 जून से 11 जुलाई तक 187.5 मिमी औसत बारिश हो चुकी है। यानी 42.5 मिमी बारिश औसत से अधिक हुई है। अब तक औसत से 42.5 मिमी ज्यादा बारिश

आरपीएससी परीक्षा के लिए 7 दिन दौड़ेंगी 4 स्पेशल ट्रेनें: बारां व झालावाड़ के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

भास्कर न्यूज| बारां राजस्थान लोक सेवा आयोग की वरिष्ठ अध्यापक प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने 12 से 18 जुलाई तक प्रतिदिन दो जोड़ी परीक्षा स्पेशल अनारक्षित ट्रेनों के संचालन का निर्णय किया है। इन ट्रेनों के संचालन से बारां, अटरू, अंता, छबड़ा, झालावाड़ और आसपास के क्षेत्रों के हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र कोटा तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। रेलवे के अनुसार गाड़ी संख्या 09803/09804 अकलेरा-कोटा-अकलेरा तथा गाड़ी संख्या 09802/09801 छबड़ा गुगोर-सोगरिया-छबड़ा गुगोर के बीच विशेष ट्रेनों का संचालन होगा। सभी ट्रेनें अनारक्षित श्रेणी की होंगी। जिले के छबड़ा गुगोर से चलने वाली परीक्षा स्पेशल ट्रेन सुबह 4:30 बजे रवाना होकर बारां स्टेशन पर सुबह 5:30 बजे, अंता पर 6:03 बजे आएगी। यहां से सुबह 7:30 बजे सोगरिया पहुंचेगी। वहीं वापसी में सोगरिया से शाम 7:15 बजे रवाना होकर बारां रात 8:26 बजे पहुंचेगी। रात 10 बजे छबड़ा गुगोर पहुंचेगी। अकलेरा-कोटा स्पेशल ट्रेन सुबह 3:05 बजे अकलेरा से रवाना होकर सुबह 6:25 बजे कोटा पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन रात 8:30 बजे कोटा से चलकर रात 12:25 बजे अकलेरा पहुंचेगी। प्रमुख स्टेशनों पर अतिरिक्त स्टाफ रहेगा रेल प्रशासन ने बताया कि परीक्षा अवधि में भीड़ प्रबंधन के लिए प्रमुख स्टेशनों पर टिकट जांच कर्मचारियों और रेलवे सुरक्षा बल के अतिरिक्त जवान तैनात किए जाएंगे। अभ्यर्थियों से टिकट लेकर यात्रा करने और परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का उपयोग करने की अपील की गई है।

प्रदेश में केवल 100 सीटों पर ही प्रवेश की व्यवस्था:ग्रेड थर्ड पीटीआई बनने की राह आसान; राजस्थान में डीपीएड की 3200 नई सीटों को सरकार की मंजूरी

राजस्थान में ग्रेड थर्ड पीटीआई बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने शारीरिक शिक्षा में दो वर्षीय डिप्लोमा (डीपीएड) की सीटों में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। सरकार ने प्रदेश में करीब 3200 नई सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यदि प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो अगले शैक्षणिक सत्र 2027-28 से कई नए संस्थानों में डीपीएड पाठ्यक्रम शुरू हो सकेगा। वर्तमान में राजस्थान में डीपीएड पाठ्यक्रम केवल दो संस्थानों में संचालित हो रहा है। इनमें राजकीय शारीरिक शिक्षा कॉलेज, जोधपुर और प्रतापगढ़ का एक निजी संस्थान शामिल है। दोनों संस्थानों में 50-50 सीटें हैं। यानी पूरे प्रदेश में अभी केवल 100 सीटों पर ही प्रवेश की व्यवस्था है। पोर्टल खुला; 52 संस्थानों ने आवेदन भी किया राज्य सरकार का कहना है कि सालों बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने नए संस्थानों के लिए आवेदन का पोर्टल खोला है। इसके बाद राजस्थान से 52 संस्थानों ने डीपीएड शुरू करने के लिए आवेदन किया है। इनमें कुछ संस्थानों ने 50 तो कुछ ने 100 सीटों की मांग की है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने करीब 3200 नई सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। आवेदन करने वाले सभी संस्थानों का अब राज्य सरकार की ओर से भौतिक सत्यापन (फिजिकल वैरिफिकेशन) कराया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर को इसके लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। तीन अधिकारियों की टीम प्रत्येक संस्थान का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण में एनसीटीई के निर्धारित मानकों के अनुसार सुविधाएं मिलने पर ही राज्य सरकार एनओसी जारी करेगी। इसके बाद संबंधित संस्थान को डीपीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति मिल सकेगी। प्रदेश में खाली हैं 2500 पीटीआई पद शिक्षा विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में थर्ड ग्रेड पीटीआई के करीब 2500 पद रिक्त हैं। सरकार का मानना है कि डीपीएड संस्थानों और सीटों की संख्या बढ़ने से आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा उपलब्ध होंगे, जिससे स्कूलों में रिक्त पदों को भरने में भी आसानी होगी। नए संस्थानों में अगले साल से शुरू होगा डिप्लोमा शिक्षा विभाग के अनुसार जोधपुर के सरकारी कॉलेज में इस वर्ष प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। वहीं नए संस्थानों में सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले शैक्षणिक सत्र से डीपीएड पाठ्यक्रम शुरू किया जा सकेगा। डीपीएड पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए किसी भी संस्थान का राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य है। साथ ही राज्य सरकार की ओर से एनओसी जारी होने के बाद ही इस डिप्लोमा को सरकारी नौकरियों के लिए वैध माना जाएगा।

चप्पल उतारकर चोरी की; तिसाया के रघुनाथजी मंदिर में दो छत्र और एक मुकुट ले गया चोर

भास्कर न्यूज| बारां सदर थानाक्षेत्र में तिसाया स्थित भगवान रघुनाथजी मंदिर में शुक्रवार देर रात करीब 3 बजे चोरी की वारदात हुई। अज्ञात चोर मंदिर से दो छत्र एवं एक मुकुट चोरी कर ले गया। खास बात यह रही कि चोर ने वारदात से पहले अपने चप्पल उतारे और उसके बाद मंदिर में प्रवेश किया। जाते समय जल्दबाजी में चप्पल और गमछा वहीं छोड़ गया। मंदर में देव प्रतिमाओं पर तीन छत्र लगे हुए थे। जिनमें से दो छत्र और मुकुट चुरा ले गया। जबकि एक छत्र को वहीं छोड़ गया। सुब​ह उसके चप्पल भी मंदिर की सीढियों के नीचे खुले मिले। गमछा भी वहीं पड़ा मिला। जिससे उसकी पहचान से जुड़े अहम सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मंदिर परिसर का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की आरटीआई रिपोर्ट में खुलासा:सुविवि को मिली चंपा बाग की 1255 करोड़ की जमीन, भूमाफियाओं ने बसा दी कॉलोनियां

स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की आरटीआई रिपोर्ट ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच के गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए वर्ष 1981 में अवाप्ति अधीन की गई चंपा बाग और निरंजनी अखाड़ा की 14.5900 हेक्टेयर (1,56,988.4 वर्गफीट) जमीन पर रसूखदारों ने अवैध कॉलोनियां, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट और बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दीं। जून 2025 की उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की न्यूनतम आवासीय नीलामी दर 8,000 रुपए प्रति वर्गफीट के आधार पर इस घोटाले से विश्वविद्यालय को 12,55,90,72,000 रुपए (करीब 1,255.90 करोड़ रुपए) की भारी-भरकम चपत लगी है। ये जानकारियां आरटीआई में सुविवि के पूर्व छात्र व एडवोकेट शक्ति सिंह भाटी को मिली हैं। इस घोटाले और घोर लापरवाही के सामने आने के बाद निधि अंकेक्षण विभाग ने कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और निजी हित धारकों को फायदा पहुंचाने के आरोप में सुविवि के तत्कालीन तीन भू-सम्पदा अधिकारियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई कराने के लिए संयुक्त सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को मामला भेजा है। कोर्ट के आदेश के बाद भी 5 महीने तक दबाई अवाप्ति की फाइल राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कई स्थगन आदेशों को खारिज करते हुए जमीन पर विश्वविद्यालय का मालिकाना हक पूरी तरह बहाल कर दिया था। इसके बावजूद सुविवि के लापरवाह अधिकारी अवाप्ति की अगली प्रक्रिया के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजने की फाइल 5 महीने से अधिक (18 दिसंबर 2024 से 24 मई 2025 तक) कुलपति कार्यालय में दबाकर बैठे रहे। ऑडिट दल के कड़े हस्तक्षेप के बाद जून 2025 में जिला कलेक्टर को पत्र भेजा गया, लेकिन तब तक भू-माफियाओं को अवैध निर्माण और डिस्ट्रेस सेल का पूरा मौका मिल चुका था। सुविवि प्रशासन इस विवादित भूमि को जिला प्रशासन से अवाप्त कराने के लिए कानूनी दांवपेंच खेलता आ रहा था, लेकिन जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेजकर अवाप्ति राशि करीब 693.33 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि के चलते हाथ खड़े कर दिए हैं। अब सुविवि के पास कोर्ट-सरकार से इस भूमि को वापस लेने के अलावा दूसरा कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। स्टे के दौरान भी तन गए रिसॉर्ट्स, होटल्स और रेस्त्रां: अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार चंपा बाग की अवाप्ति अधिसूचना प्रभावी होने के बावजूद भू-माफियाओं ने कानून की धज्जियां उड़ाकर अवैध कॉलोनियां काट दीं। वर्ष 2014 की कई सेल डीड में साफ लिखा गया कि जमीन सुविवि के अवाप्ति चक्र में है, यदि अधिग्रहित हुई तो विक्रेता की जिम्मेदारी नहीं होगी। इसे डिस्ट्रेस सेल दिखाकर स्टांप ड्यूटी की चोरी की गई। स्थगन आदेशों के दौरान भी चम्पाबाग का परकोटा ढहाया गया और वहां धड़ल्ले से अवैध सड़कें निकाली गईं। इसी भूमि पर बिना किसी भू-उपयोग परिवर्तन (कन्वर्जन) के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती रहीं। हद तो तब हो गई जब मास्टर प्लान की 60 फीट सड़क सीमा में आ रहे पक्के निर्माण के बदले तत्कालीन यूआईटी (अब यूडीए) ने 1,98,52,000 रुपए का मुआवजा भी बांट दिया। कानून तोड़ने वालों पर नरमी न बरतें: ऑडिट रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के कनीज़ अहमद बनाम साबुद्दीन मामले का हवाला देते हुए कहा है कि जानबूझकर कानून तोड़ने वालों पर नरमी न बरती जाए और न अवैध निर्माण रेगुलराइज हो। विभाग ने निर्देश दिया है कि अवाप्ति प्रक्रिया को तुरंत लॉजिकल एंड तक पहुंचाया जाए, अन्यथा समय बीतने पर यह अवाप्ति स्वतः निरस्त हो जाएगी। साथ ही यूडीए, नगर निगम और उप-पंजीयक कार्यालय को पत्र लिखकर इस भूमि की रजिस्ट्री, पट्टा वितरण व नामांतरण पर रोक लगाने को कहा गया है।

एमएसजे में नए प्राचार्य ने संभाला पदभार

भरतपुर| वनस्पति शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ.संजय कुमार ने महारानी श्री जया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को कार्यभार संभाल लिया है। डॉ. संजय ने राजस्थान सरकार उच्च शिक्षा ग्रुप-3 विभाग के शासन उप सचिव के आदेशानुसार प्राचार्य के पद पर कार्यभार ग्रहण किया है। डॉ. संजय कुमार इससे पूर्व राजकीय महाविद्यालय पहाड़ी में प्राचार्य के पद पर कार्यरत थे। मीडिया प्रभारी डॉ.अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि डॉ.संजय कुमार इससे पूर्व भी महारानी श्री जया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग में 27 वर्षों तक संकाय सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं।

अंकुरित सोयाबीन में कर रहे खरपतवार नाशक स्प्रे

भास्कर न्यूज | सकतपुर कस्बे सहित आसपास के कई गांवों में प्री-मानसून की बारिश के दौर के बाद कई खेतों में किसानों ने सोयाबीन की बुवाई कर दी थी। कई किसानों ने मानसून की बारिश के बाद बुवाई की। इस समय खेतों में सोयाबीन की फसल अंकुरित होने लगी है। जिससे खेत हरे-भरे नजर आने लगे हैं। खेतों में सोयाबीन की फसल में उग रही खरपतवार को नष्ट करने के लिए किसान दवाइयों का स्प्रे कर रहे हैं।

बुटाटी धाम में समिति ने किया 22 करोड़ का गबन:फर्जी बिल लगाकर पैसे उठाए, गोशाला के नाम पर फर्जीवाड़ा; चढ़ावा, सोने-चांदी का रिकॉर्ड भी नहीं

नागौर के बुटाटी स्थित संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर विकास समिति के वित्तीय कामकाज की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कलेक्टर के आदेश पर गठित जांच कमेटी ने मंदिर समिति के लेखा अभिलेखों, बैंक लेनदेन, वाउचर और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी है। रिपोर्ट में सोना-चांदी के लेखांकन से लेकर भोजनशाला निर्माण, रसोई, किराया आय, सीसीटीवी, सुरक्षा, गौशाला, मरम्मत कार्यों, वेतन, ऑडिट, पेट्रोल-डीजल के खर्च आदि में गबन और निधि का दुरुपयोग माना है। समिति ने 146 दिन तक पड़ताल के बाद 23 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। जांच रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 और 2024-25 में 15.16 करोड़ का प्रमाणित गबन सामने आया। वहीं 2025-26 के रिकॉर्ड जांच दल को उपलब्ध नहीं कराने पर प्रतिकूल अनुमान पर 7.58 करोड़ का गबन जोड़ते हुए कुल 22.74 करोड़ की कथित गबन का आकलन किया गया है। जांच में खुलासा; भामाशाह ने बनवाई भोजनशाला, समिति ने अपना खर्च बताया जांच रिपोर्ट में खर्च और भुगतान की विभिन्न मदों में 5 करोड़ 68 लाख 15 हजार 633 रुपए की वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा सुलभ कॉम्प्लेक्स की 18.12 लाख रुपए की किराया आय खातों में दर्ज नहीं मिली, जबकि करीब 2.60 करोड़ के सोना-चांदी के लेखांकन पर भी आपत्ति जताई गई है। खर्च-भुगतान, आय और संपत्ति के मूल्य को मिलाकर रिपोर्ट में कुल 8 करोड़ 46 लाख 27 हजार 633 रुपए का कथित घोटाला माना गया है। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने 29 जनवरी 2026 को पहले 6 सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। बाद में इसमें 7 और सदस्य जोड़े गए और समिति 13 सदस्यीय हो गई। डेगाना के तत्कालीन एसडीएम मोहन चौधरी ने 146 दिन बाद, 23 जून 2026 को जांच रिपोर्ट कलेक्टर देवेंद्र कुमार को सौंप दी। 2.60 करोड़ के जेवर का रिकॉर्ड नहीं पुरानी समिति के पास 36 किलो चांदी, 250 ग्राम सोना था। नई समिति ने कार्यभार ग्रहण करते समय 35.5 किलो चांदी, 280 ग्राम सोना बताया। वर्तमान में 2.60 करोड़ मूल्य की संपत्ति है, लेकिन लेखा में दर्ज ही नहीं है। ग्राम विकास में 1.28 करोड़ का खेल
2024-25 में ग्राम विकास पर 31.37 लाख खर्च दर्शाए गए, न ठेकेदारों का रिकॉर्ड न भौतिक प्रमाण। कंप्यूटर, फर्नीचर के नाम पर 97.48 लाख बिना बिल, वर्क ऑर्डर के खर्च दिखाए। 82.41 लाख के सीसीटीवी का खर्च: सीसीटीवी कैमरों पर 82.41 लाख खर्च किए गए, लेकिन कोई निविदा नहीं मिली। एम जंक्शन सर्विसेज के नाम 58.14 लाख का भुगतान दर्ज। वाउचर रानाबाई ट्रेडर्स के नाम मिले। इसे भी गड़बड़ी माना गया। दान पेटी व खातों में लाखों का अंतर: दान पेटी की आय ऑडिट रिपोर्ट व रोकड़ बही में अलग-अलग दर्ज मिली। 2023-24 और 2024-25 की आय में अंतर। ग्राम सेवा सहकारी बैंक खाते में 3.40 लाख, ग्रामीण बैंक खाते में 1.75 लाख रुपए का अंतर मिला। रसोई में 49.49 लाख का फर्जी खर्च: भोजनशाला निर्माण पर 49.49 लाख खर्च दिखाए, जबकि ग्राउंड फ्लोर का पूरा निर्माण एक भामाशाह ने कराया था। समिति ने फर्जी बिल लगा मंदिर निधि से राशि निकाल ली। रसोई खर्च 1 साल में 335 प्रतिशत बढ़ गए। गोशाला में भी अनियमितता: सुलभ कॉम्प्लेक्स से प्राप्त 18.12 लाख का किराया मुख्य लेखा पुस्तकों में दर्ज नहीं। गोशाला रखरखाव के नाम पर 17.87 लाख खर्च दिखाए, जबकि समिति ने राशि मिलने से इनकार किया। सुरक्षा व्यवस्था में 31.33 लाख रुपए खर्च दर्शाए गए। अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित 11 पदाधिकारियों पर FIR की सिफारिश एसडीएम ने रिपोर्ट में अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित तत्कालीन व वर्तमान 11 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, खातों के मिथ्याकरण और साक्ष्य नष्ट करने जैसी धाराओं में एफआईआर की सिफारिश की है। निजी संपत्तियां कुर्क करने की भी मांग की गई है। जब भी डॉक्यूमेंट मांगे, हमने 3 दिन में दिए। आगे भी अगर वापस मांगे जाते हैं तो हम देने के लिए तैयार हैं। हमारी तरफ से कोई गड़बड़ नहीं है। – देवेंद्र सिंह, समिति अध्यक्ष

20 तक बढ़ा एलईडी वितरण कैंप

भरतपुर | प्रधानमंत्री ग्रामीण उजाला योजना के तहत भरतपुर इलेक्ट्रिसिटी सर्विसेज लिमिटेड के बिजली घर कार्यालय पर एलईडी बल्ब वितरण कैंप की अवधि बढ़ा दी गई है। कैंप 1 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक चलना था। अब यह 20 जुलाई तक चलेगा। यहां लिब्रोटेक एलईडी बल्ब का वितरण होगा। बीइएसएल के पीआरओ सुधीर प्रताप सिंह ने बताया कि योजना में 200 रुपए में 5 एलईडी बल्ब दिए जाएंगे। इनमें 2 बल्ब 12 वॉट के होंगे। 3 बल्ब 9 वॉट के होंगे। 200 रुपए में एक चार्जिंग वाला बल्ब भी मिलेगा। 150 रुपए में 1 चार्जिंग टॉर्च मिलेगी। टॉर्च 1 साल की गारंटी पर दी जाएगी।

फतेहगढ़ को-ऑपरेटिव बैंक में 2 महीने से लेन-देन प्रक्रिया ठप

फतेहगढ़ उपखंड की को-ऑपरेटिव बैंक शाखा में पिछले कई दिनों से भुगतान नहीं हो रहा है। ग्रामीण परेशान हैं। शाखा में ज्यादातर खाते फतेहगढ़ ग्रामीण क्षेत्र के गरीब किसानों के हैं। इन खातों में पेंशन के रुपए आते हैं। वीबी-जी राम जी मजदूरी का भुगतान आता है। किसान सम्मान निधि के रुपए आते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्त भी इसी खाते में आती है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो महीने से बैंक किसी भी तरह का भुगतान नहीं कर रही है। लोग अपनी गाढ़ी कमाई के लिए भटक रहे हैं। फतेहगढ़ शाखा ही नहीं, जैसलमेर की मुख्य को-ऑपरेटिव बैंक में भी पिछले एक से डेढ़ महीने से भुगतान नहीं हो रहा है। ग्रामीणों के सामने प्रधानमंत्री आवास का निर्माण बड़ा संकट बन गया है। गांव में पंचायत आवास नहीं बनाने वालों को नोटिस दे रही है। बैंक भुगतान नहीं कर रही है। ग्रामीण रोज इस उम्मीद में फतेहगढ़ को-ऑपरेटिव बैंक पहुंचते हैं कि आज रुपए मिलेंगे। लेकिन वहां से निराशा मिलती है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर बैंक के पास भुगतान के लिए रुपए नहीं हैं, तो सरकारी रुपए इन खातों में डाले ही क्यों जा रहे हैं।