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कांग्रेस ने दतिया राजघराने के घनश्याम को बनाया प्रत्याशी:भास्कर से बोले- भाजपा से सीधी लड़ाई, तीसरी पार्टियां BJP की बी टीम; आशुतोष से होगा मुकाबला

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व विधायक और दतिया राजघराने के मुखिया घनश्याम सिंह को उम्मीदवार घोषित किया है। इसकी घोषणा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने की। घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच सीधा मुकाबला होगा। प्रत्याशी घोषित होने के बाद घनश्याम सिंह ने दैनिक भास्कर से कहा- उन्होंने चुनाव की पूरी तैयारी कर ली है। कांग्रेस विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। मुकाबला सीधा कांग्रेस और भाजपा के बीच होगा। कांग्रेस जीतेगी। घनश्याम सिंह का नाम घोषित होते ही समर्थकों में खुशी का माहौल है। वे सड़कों पर पटाखे फोड़कर जश्न मना रहे हैं। दतिया किले पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई है। वे कांग्रेस प्रत्याशी बनने पर बधाई देकर खुशियां मना रहे हैं। दतिया उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। अब कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच सीधा मुकाबला होगा। ये तस्वीरें देखिए… नाम की घोषणा से पहले दैनिक भास्कर ने कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम से बात की सवाल: आप प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं, कार्यकर्ताओं में भी जोश है, क्या रणनीति रहेगी आपकी? जवाब: रणनीति यह रहेगी कि हम सब लोग पूरी जोरदार तरीके से चुनाव लड़ेंगे। जनता से वादा करेंगे। हमारी राजनीति विकास की राजनीति होनी चाहिए। जो पुरानी राजनीति थी, वो बहाल होनी चाहिए। सभी समाजों में सद्भावना होनी चाहिए। सवाल: आजाद समाज पार्टी ने भी अभी अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाया है, उसे आप किस नजरिए से देखते हैं? जवाब: उसमें 80% लोग दूसरे जिलों के बाहर के थे। झांसी, निवाड़ी, टीकमगढ़, शिवपुरी, दतिया, जालौन, भिंड, मुरैना, ग्वालियर के लोग थे। इसलिए उनका शक्ति प्रदर्शन देखने में जो ज्यादा लग रहा था, वो स्थानीय राजनीतिक शक्ति नहीं है। सवाल: आपके हिसाब से मुकाबला सिर्फ कांग्रेस और बीजेपी में ही रहेगा? जवाब: हां, मुकाबला आमने-सामने का ही होगा, क्योंकि जनता अब जान चुकी है कि ये (तीसरी पार्टियां) तो केवल वोट काटने और भाजपा को जिताने के लिए होती हैं। भाजपा की ‘बी टीम’ की तरह खड़ी हुई हैं। जनता यह बात अच्छी तरह समझ चुकी है। सवाल: क्या स्थानीय उम्मीदवार को लेकर जनता में चर्चा है? जवाब: हां, बिल्कुल चर्चा है और होनी भी चाहिए। समाजों को एक-दूसरे से लड़ाने वाली जाति या धर्म आधारित राजनीति को हमें खत्म करना है। हमारी राजनीति विकास की राजनीति होगी। ……………………………………………. दतिया उपचुनाव से जुड़ी खबर पढ़ें… एमपी- नरोत्तम का टिकट कटने पर हिंसा मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को चुनाव होना है। यहां से भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। शुक्रवार शाम यह खबर फैलते ही एमपी के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थक भड़क गए। उन्होंने हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कुछ देर में पथराव, चक्काजाम और पुलिस से झड़प शुरू हो गई। पढ़ें पूरी खबर…

सरकारी स्कूल के गेट पर फूट-फूटकर रोईं बच्चियां, VIDEO:प्रिंसिपल-3 टीचर का ट्रांसफर होने से नाराज छात्रों ने गेट पर ताला लगाया; धरने पर बैठे

बालोतरा जिले में प्रिंसिपल और 3 ग्रेड सेकेंड टीचरों के तबादले होने पर स्कूली बच्चियां फूट-फूटकर रोने लग गईं। नाराज छात्र-छात्राओं और परिजनों ने स्कूल गेट पर ताला जड़कर तबादला निरस्त करने की मांग करने लगे। छात्र-छात्राएं स्कूल के बाहर बैठ गए। सूचना पर शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बच्चों-परिजनों से बात की। उनकी मांग को देखते हुए 3 टीचरों को डेपुटेशन पर लगाया। इसके बाद बच्चों-परिजनों ने स्कूल का गेट खोल दिया। मामला धोरीमना इलाके के गेनाणियों का तला गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल का है। देखिए- छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन की तस्वीरें प्रिंसिपल और तीन टीचर के ट्रांसफर से बढ़ी नाराजगी
10 जुलाई तक प्रदेश में हर विभाग में तबादले हो रहे थे। इसमें प्रिंसिपल और ग्रेड सेकेंड टीचर्स के भी तबादले हुए। स्कूल के प्रिंसिपल देवाराम चौधरी, सीनियर टीचर रेखाराम, देरावर सिंह और जगमाराम का भी अन्य स्कूलों में तबादला कर दिया गया। टीचर्स के ट्रांसफर की सूचना छात्र-छात्राओं को मिली तो वे नाराज हो गए। बच्चों के साथ पेरेंट्स ने भी स्कूल गेट पर ताला लगाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षकों का तबादला निरस्त करने की मांग करने लगे। सूचना मिलने पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्टूडेंट्स से बात की। इस दौरान कुछ छात्राएं फूट-फूटकर रोने लगीं। इसके बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने उच्चाधिकारियों से बात की। स्कूल में 300 से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ रहे
पेरेंट्स का कहना है कि स्कूल में 300 से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ने आते हैं। स्कूल में कुल 10 स्टाफ था। इनमें से प्रिंसिपल और 3 सीनियर टीचर का ट्रांसफर होने से पढ़ाई की पूरी व्यवस्था बिगड़ जाएगी। सरकार और प्रशासन या तो शिक्षकों के तबादले निरस्त करें या हमारे बच्चों की टीसी दें। सहायक मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (एसीबीईओ) बाबूलाल ने बताया कि बच्चों और पेरेंट्स से बातचीत की गई। उनकी मांगों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया गया। इसके बाद डेपुटेशन पर 3 शिक्षकों को यहां लगाया गया है। ये खबर भी पढ़िए… रोडवेज कंडक्टर ने छात्र की कॉलर पकड़ी, गर्दन दबाई, VIDEO:प्रबंधक बोले- मामले में समझाइश हो गई; परीक्षार्थी ने कहा- मैंने पुलिस में शिकायत दी है बाड़मेर बस स्टैंड पर सेकेंड ग्रेड परीक्षार्थी और कंडक्टर के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई हो गई। कंडक्टर के कॉलर पकड़ने पर परीक्षार्थी ने भी उसकी कॉलर पकड़ ली। (पढ़ें पूरी खबर)

सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार से बोला-आपको पब्लिक में बेनकाब करेंगे:मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लाने पर फटकारा, विदेशी नागरिक की जमानत का मामला

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत का विरोध करने, लेकिन मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लाने पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार हर मामले में जमानत का विरोध करती है, लेकिन ट्रायल जल्द पूरा कराने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाती। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति रही तो वह सरकार को पब्लिक में बेनकाब करेगा। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच एक विदेशी नागरिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी अपहरण और हत्या के मामले में गिरफ्तार है। उसने कोर्ट को बताया कि वह पिछले चार साल से जेल में है और इस दौरान उसका मामला ट्रायल कोर्ट में 86 बार लिस्ट हुआ, लेकिन उसे 53 बार कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया। चार साल में सिर्फ दो गवाहों की गवाही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं करना महाराष्ट्र सरकार की गंभीर चूक है। अदालत ने कहा कि चार साल में 34 में से सिर्फ दो गवाहों की गवाही हो पाई है। यह स्थिति परेशान करने वाली है। महाराष्ट्र ने कहा- अब हर तारीख पर पेश किए जा रहे आरोपी महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि अब राज्य सभी आरोपियों को हर सुनवाई की तारीख पर ट्रायल कोर्ट में पेश कर रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को मुकदमों की सुनवाई तेज करने के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि हर सप्ताह कम से कम चार गवाहों की गवाही दर्ज की जाए और इस आदेश को रिकॉर्ड पर रखा जाए। बेंच ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में इस तरह के मामले अदालत के सामने आए तो ऐसे ही कड़े आदेश पारित किए जाएंगे। —————————————————– ये खबर भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट बोला-पैदल चलने वालों को परेशानी समझते हैं ड्राइवर:फुटपाथ पर चलना बुनियादी अधिकार, अब इसका उल्लंघन हुआ तो जिम्मेदारों पर एक्शन होगा नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और एएस चंदुरकर की बेंच ने एक अहम फैसले में कहा कि तय रास्तों पर मोटर गाड़ियों के मुकाबले इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…

समय बदलने से एफसीआई पल्लेदार-मजदूरों में नाराजगी:सीटू की चेतावनी- बदलाव नहीं करने पर सोमवार से गेहूं उठाव बंद

भीषण गर्मी और उमस के बीच गेहूं उठाव का समय बदलने से एफसीआई पल्लेदार मजदूरों में भारी नाराजगी है। एफसीआई पल्लेदार मजदूर यूनियन (सीटू) ने चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक गेहूं उठाव का समय नहीं बदला गया, तो सोमवार से जिलेभर के एफसीआई डिपो और अनाज मंडियों में काम बंद कर दिया जाएगा। यह निर्णय शनिवर को संगरिया स्थित दर्शन कोड़ा मजदूर भवन में जिला अध्यक्ष आत्मा सिंह की अध्यक्षता में हुई सीटू की जिला कमेटी की बैठक में लिया गया। यूनियन ने प्रशासन के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। बैठक में जिला सचिव गुरुप्रेम सिंह ने बताया कि जिले में भीषण गर्मी और उमस का दौर जारी है। इसके बावजूद अधिकारियों ने गेहूं की लोडिंग और निकासी का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित कर दिया है। उनका कहना था कि गोदाम सुबह 10 बजे खुलते हैं और कांटा होने में ही लगभग 11 बज जाते हैं, जिसके बाद मजदूरों को दिनभर तेज धूप और उमस में काम करना पड़ता है। यूनियन नेताओं ने बताया कि इस कारण कई मजदूरों को काम के दौरान चक्कर आने और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। जिला अध्यक्ष आत्मा सिंह ने आरोप लगाया कि एफसीआई के जिला प्रबंधक मजदूर यूनियन के प्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाते। समस्याओं के समाधान के लिए कई बार ई-मेल भी भेजे गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। छोटी समस्याओं के लिए भी मजदूरों को श्रीगंगानगर जाना पड़ता है। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण डबली और टिब्बी मंडियों में अब तक गेहूं का उठाव पूरा नहीं हो पाया है। जहां पहले 20 जून तक मंडियां खाली हो जाती थीं, वहीं इस बार जुलाई के दूसरे सप्ताह में भी उठाव जारी है। डबली मंडी में तीन लाख कट्टों की खरीद की अनुमति मिलने के बावजूद गुणवत्ता निरीक्षक और एफसीआई अधिकारियों की कार्यशैली से काम प्रभावित हो रहा है। यूनियन नेताओं ने कहा कि ट्रक, ट्रॉलियां और मजदूर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं, फिर भी केवल आधे दिन ही काम कराया जा रहा है। इससे किसानों, व्यापारियों और मजदूरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बैठक में सर्वसम्मति से मांग की गई कि गेहूं उठाव का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक किया जाए। ऐसा नहीं होने पर सोमवार से जिलेभर में काम बंद कर प्रदर्शन और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक में कामरेड शेर सिंह शाक्य, जगजीत सिंह, राजकुमार, लाल सिंह, राम सिंह, बिंटू, राजेश सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

राजस्थान के थानों में दिव्यांगों के लिए होगी खास सुविधाएं:दिव्यांगजनों से जुड़े अपराधों में संबंधित धाराएं जोड़ने की पहल की जाएगी

राजस्थान में दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें न्याय तक पहुंच दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। गृह विभाग के संज्ञान के बाद पुलिस विभाग दिव्यांगजनों से जुड़े अपराधों में संबंधित धाराएं जोड़ने और थानों को दिव्यांग अनुकूल बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। इस पहल के लागू होने पर दिव्यांगजनों के साथ होने वाले अपराध, मारपीट, शोषण, भेदभाव और उत्पीड़न के मामलों में खास अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव होगी। इससे पुलिस की कार्रवाई अधिक संवेदनशील और अधिकार आधारित बन सकेगी। इन सुविधाओं की मांग की गई थी इस संबंध में पेनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के संस्थापक उदयपुर के अर्थ डायग्नोस्टिक्स के सीईओ डॉ. अरविंदर सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर पुलिस थानों में रैंप, रेलिंग, व्हीलचेयर, ब्रेल संकेतक, सुगम शौचालय और बाधा-रहित प्रवेश जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की मांग की थी। साथ ही दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की धाराओं को अनिवार्य रूप से शामिल करने का आग्रह किया था। डॉ. सिंह के अनुसार, प्रदेश के हजारों दिव्यांगजन न्याय पाने से पहले ही थाने तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करते हैं। यदि पुलिस थाने सुगम होंगे तो वे अधिक आत्मविश्वास, सुरक्षा और गरिमा के साथ अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। उनके पत्र के बाद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सिविल राइटस एंड एचएचटी) ने पत्र के जरिए कहा कि इस संबंध में पुलिस की आवासन शाखा की और से कार्रवाई की जा रही है। अरविंदर सिंह का कहना है कि गृह विभाग और राजस्थान पुलिस के स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिए जाने को दिव्यांग अधिकारों के क्षेत्र में अहम कदम माना जा रहा है। इससे पुलिस अधिकारियों में भी दिव्यांग अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी और संबंधित मामलों में कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।

झालावाड़ पुलिस लाइन बनी हरियाली की मिसाल:एसपी ने नेतृत्व में 800 पौधे लगाए, देखभाल का लिया संकल्प

झालावाड़ में राज्य सरकार के “हरियालो राजस्थान” अभियान के तहत शनिवार को पुलिस लाइन में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पुलिस परेड ग्राउंड, आवासीय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 800 पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनाने का भी संकल्प लिया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एसपी अमित कुमार ने इस अवसर पर कहा कि पौधारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करने का एक संकल्प है। उन्होंने बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर अधिक से अधिक पौधरोपण की आवश्यकता पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में एडिशनल एसपी भागचंद्र मीणा, डिप्टी हर्षराज सिंह, संचित निरीक्षक मोहनलाल सहित पुलिस लाइन के अन्य अधिकारी-कर्मचारी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

सत्संग ही मनुष्य के कल्याण का सबसे सरल मार्ग: ओझा:सिंदरथ में भागवत कथा संपन्न, कथा में आई पूरी राशि गौशाला को दान

सिंदरथ गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन शनिवार को हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबियों ने कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह के कन्यादान, आरती और दक्षिणा सहित प्राप्त समस्त दान गौशाला में समर्पित किए गए। विद्वान पंडित एवं ज्योतिषाचार्य जनार्दन ओझा ने सात दिनों तक कृष्ण चरित्र का जीवंत बखान किया। मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी और पूरे सप्ताह कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा। पंडित ओझा ने बताया कि श्रीमद् भागवत महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक विचारों का संचार होता है और उसे जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध होता है। उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग ही मनुष्य के कल्याण का सबसे सरल मार्ग है। श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन उन्होंने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंगों का वर्णन किया। पंडित ओझा ने कहा कि मित्रता कैसे निभाई जाए, यह भगवान कृष्ण और सुदामा के प्रसंग से समझा जा सकता है। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। उन्होंने आगे कहा कि परमात्मा कभी अमीरी-गरीबी या जात-पात नहीं देखते, वे तो केवल सच्चे प्रेम और निष्काम भक्ति के भूखे हैं। जब सुदामा द्वारका पहुंचे, तो द्वारकाधीश ने अपने सिंहासन पर बिठाकर उनके चरण अपने आंसुओं से धोए। परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाते हुए पंडित ओझा ने बताया कि परीक्षित ने शुकदेवजी से पूछा कि मृत्यु के निकट खड़े व्यक्ति को क्या करना चाहिए। तब शुकदेव ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का अमृत पान कराया। इस कथा के श्रवण से परीक्षित के सारे संताप, शोक और जन्म-जन्मांतर के पाप धुल गए। यह प्रसंग हमें बताता है कि कलियुग में भगवत नाम स्मरण और कथा श्रवण से सहज ही मुक्ति मिल जाती है। पूर्णाहुति के पावन अवसर पर सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा भी कथा स्थल पर पहुंचे उन्होंने भागवतजी का विधि-विधान से पूजन कर महाआरती उतारी। लोढ़ा ने कथाव्यास पंडित जनार्दन ओझा का पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। लोढ़ा ने इस भव्य और अनुशासित आयोजन के लिए सिन्दरथ की धर्मप्रेमी जनता और सोनी परिवार की सराहना की। कथा की समस्त राशि गौ सेवा में समर्पित
इस धार्मिक महोत्सव ने समाज के सामने सेवा का एक अद्भुत उदाहरण पेश किया। कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह में आए कन्यादान की राशि, नित्य पूजन, आरती और दक्षिणा सहित भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई समस्त गुप्त और प्रकट दान राशि को स्थानीय गौशाला में दान कर दिया गया। इस पुनीत कार्य की सबने सराहना की। कथा व्यास ओझा ने बताया कि इस कथा की विशेषता यह रही कि स्वयं श्रीद्वारकाधीश भगवान इस कथा के मुख्य आयोजक थे। भगवान के प्रतिनिधि के रूप में राजेश सोनी परिवार ने पूरी निष्ठा के साथ मुख्य यजमान और व्यवस्थापक की भूमिका निभाई।

नागौर में बनेगा राजस्थान का पहला टेंट डीलर-समिति का भवन:भूमि पूजन के बाद नवगठित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई

नागौर में चेनार रोड पर माली समाज भवन में शनिवार को जिला टेंट डीलर समिति का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान बनने वाले राजस्थान के पहले टेंट डीलर समिति के शामियाना भवन का भूमि पूजन भी किया गया। साथ ही नवगठित नागौर जिला टेंट डीलर समिति के पदाधिकारियों को शपथ भी दिलाई गई। समारोह में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में टेंट व्यवसायी मौजूद रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेशाध्यक्ष रासबिहारी शर्मा, अजमेर संभाग अध्यक्ष मोहम्मद अजीम (अज्जू भाई), माली समाज संस्थान के अध्यक्ष कुपाराम देवड़ा और कोषाध्यक्ष मुकेश छीपा रहे। एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान समिति के जिलाध्यक्ष तुलसीराम सांखला ने बताया- शहर के गुड़ला रोड पर प्रस्तावित शामियाना भवन 50×50 फीट क्षेत्र में बनाया जाएगा। इसमें एक ब्लैंकेट हॉल, कार्यालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएगी। भवन का उपयोग टेंट व्यवसाय से जुड़े लोगों के ठहरने, बैठकों और विभिन्न आयोजनों के लिए किया जाएगा। उन्होंने सभी टेंट व्यवसायियों से समिति को मजबूत बनाने और एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। व्यवसायियों को सुविधाएं नहीं मिल रही प्रदेशाध्यक्ष रासबिहारी शर्मा ने कहा- राजस्थान सरकार की ओर से टेंट व्यवसाय को एमएसएमई (MSME) के दायरे में शामिल किया जाना स्वागत योग्य कदम है। इसके लिए उन्होंने सरकार का आभार जताया, लेकिन कहा- उद्योग का दर्जा मिलने के बावजूद व्यवसायियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रियायती दरों पर भूखंड उपलब्ध कराए उन्होंने सरकार से मांग की कि रीको क्षेत्र में टेंट व्यवसायियों को रियायती दरों पर भूखंड उपलब्ध कराए जाएं। वर्तमान में शहर के बीच स्थित गोदामों में बड़ी मात्रा में कपड़ा और अन्य सामग्री रखी होने से हमेशा अग्नि दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके अलावा एमएसएमई के तहत कम ब्याज वाले बैंक ऋण की प्रक्रिया को सरल बनाने, गोदामों के लिए रियायती बिजली दरें लागू करने तथा टेंट व्यवसाय के लिए अलग शामियाना ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने की भी मांग रखी। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में सुरेश गौड़, रामस्वरूप कच्छवाह, संपत कच्छवाह, मूलचंद भाटी, लीलमचंद रामावत, भंवरलाल, सुरेंद्र सिंह चौधरी, रामनिवास सोलंकी, ताराचंद सांखला सहित बड़ी संख्या में टेंट व्यवसायी उपस्थित रहे।

प्रतापगढ़ में हिस्ट्रीशीटर का अवैध निर्माण ध्वस्त:पुलिस-प्रशासन ने नौगांवा में चलाया बुलडोजर, मादक पदार्थ तस्करी में शामिल तीनों बेटे

प्रतापगढ़ में नशा तस्करों और कुख्यात अपराधियों के खिलाफ पुलिस-प्रशासन का बुलडोजर अभियान जारी है। इसी कड़ी में अरनोद थाना क्षेत्र के नौगांवा में हिस्ट्रीशीटर जरीन खान के अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया गया। जरीन खान और उसके तीनों बेटों पर मादक पदार्थ तस्करी सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। तीनों बेटे मादक पदार्थ तस्करी में आरोपी अरनोद थाना अधिकारी शिवलाल मीणा ने बताया-जरीन खान अरनोद थाने का हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात अपराधी है। उसके खिलाफ हत्या सहित एक दर्जन से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह हत्या के एक मामले में सजायाफ्ता भी है। उसके तीनों बेटे शाहरुख, अरबाज और सलमान भी मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में आरोपी हैं। पुलिस के अनुसार, जरीन खान ने नौगांवा में चारागाह भूमि पर लगभग दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में अवैध रूप से मकान बना रखा था। प्रशासन ने पहले ही अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद आज पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर से पूरे अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। अतिरिक्त पुलिस बल किया तैनात कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देशन में छह पुलिस थानों के जाब्ते के साथ रिजर्व पुलिस लाइन का अतिरिक्त बल तैनात किया गया। यह पूरी कार्रवाई अरनोद तहसीलदार नितिन मेरावत के निर्देशन में शांतिपूर्वक संपन्न हुई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों और अपराधियों द्वारा खड़ी की गई अवैध संपत्तियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। पिछले एक महीने में प्रतापगढ़ जिले में पुलिस और प्रशासन ने तस्करों तथा कुख्यात अपराधियों के खिलाफ पांच बुलडोजर कार्रवाई कर करोड़ों रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियों को ध्वस्त किया है। इन लगातार हो रही कार्रवाइयों से अपराधियों और मादक पदार्थ तस्करों में खौफ का माहौल है।

दुनिया घूमने की आजादी काफी महंगी:सबसे ताकतवर पासपोर्ट वाले देशों के नागरिक चुका रहे सबसे ज्यादा 57% तक टैक्स

दुनिया में बिना वीसा ज्यादा देशों की यात्रा करने की आजादी भी एक बड़ी कीमत के साथ आती है। ‘ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026’ बताता है कि दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट रखने वाले देशों के नागरिक सबसे ज्यादा टैक्स भी चुकाते हैं। रैंकिंग में पहले स्थान पर रहे स्वीडन के साथ फिनलैंड और डेनमार्क जैसे देशों में प्रभावी टैक्स 56-57% तक पहुंच जाता है। इसी टैक्स से वहां मुफ्त शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं का खर्च उठाया जाता है। इंडेक्स में शीर्ष 10 में से 9 स्थान यूरोपीय देशों के पास हैं। स्वीडन पहले, स्विट्जरलैंड दूसरे और फिनलैंड तीसरे स्थान पर हैं। टॉप-10 में शामिल एकमात्र गैर-यूरोपीय देश सिंगापुर है। यानी दुनिया में सबसे ज्यादा यात्रा की आजादी देने वाले पासपोर्ट पर यूरोप का दबदबा है, लेकिन इसके साथ सबसे भारी टैक्स बोझ भी जुड़ा है। हालांकि पूरे यूरोप की तस्वीर एक जैसी नहीं है। स्विट्जरलैंड और नॉर्वे ऐसे अपवाद हैं, जहां बेहतर जीवन स्तर और मजबूत शासन के साथ अपेक्षाकृत कम प्रभावी टैक्स दरें हैं। खासकर स्विट्जरलैंड कम टैक्स के कारण निवेशकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। एशिया की बात करें तो सिंगापुर 10वें स्थान के साथ टॉप-10 में शामिल अकेला देश है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (21वें), जापान (23वें), हॉन्गकॉन्ग और दक्षिण कोरिया का स्थान है। निवेश की आजादी के मामले में सिंगापुर दुनिया में पहले, हॉन्गकॉन्ग दूसरे और यूएई पांचवें स्थान पर है। सिंगापुर की प्रति व्यक्ति आय 92,270 डॉलर है, जबकि यूएई और हॉन्गकॉन्ग भी ऊंची आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। खास बात यह है कि यूएई में टैक्स का बोझ लगभग शून्य है, जबकि सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग भी कम टैक्स के साथ निवेश और संपत्ति निर्माण के लिए अनुकूल माहौल देते हैं। भारत इस इंडेक्स में 197 देशों के बीच 125वें स्थान पर है। भारतीय पासपोर्ट धारकों को सिर्फ 26 देशों में वीसा-मुक्त या वीसा-ऑन-अराइवल यात्रा की सुविधा मिलती है। यानी भारत के नागरिक अपेक्षाकृत कम टैक्स देते हैं, लेकिन वैश्विक यात्रा की आजादी के मामले में अभी भी काफी पीछे हैं। स्विट्जरलैंड, नॉर्वे अपवाद…पासपोर्ट दमदार, प्रभावी टैक्स भी कम यूरोप में कम टैक्स वाले देश आमतौर पर यूरोपीय संघ से बाहर हैं। स्विट्जरलैंड और नॉर्वे इसके अपवाद हैं, जो बेहतरीन शासन और ऊंचे जीवन स्तर के साथ कम प्रभावी टैक्स दरें लगाते हैं। नॉर्वे भी ईयू का सदस्य न होने के बावजूद मजबूत पासपोर्ट में बना हुआ है। स्विट्जरलैंड पूरे यूरोप में सबसे कम टैक्स लेकर निवेशकों को आकर्षित करता है।