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बंबोरी शिविर में राजस्व विभाग ने रास्तों से जुड़े प्रकरण निपटाए

सकतपुर| कस्बे के समीपवर्ती बंबोरी ग्राम पंचायत मुख्यालय पर गुरुवार को ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित किया गया। जिसमें ग्राम पंचायत क्षेत्र से बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने समस्याओं का निस्तारण कराया तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लिया। शिविर प्रभारी तहसीलदार महेंद्र चतुर्वेदी, एबीडीओ प्रेमप्रकाश गुप्ता, बीडीओ राहुल कुमार बैरवा, एईएन मुकुट नागर ने बताया कि शिविर में कई विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने सेवाएं दी। लाभार्थियों को आवासीय पट्टे दिए गए। जॉब कार्ड बनाए गए। टीबी बीमारी से पीड़ित मरीजों को पोषण किट बांटे गए। राजस्व विभाग ने रास्तों से जुड़े प्रकरण निपटाए। नामांतरण किया। नाम शुद्धिकरण के काम हुए। किसानों के लिए फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन की सुविधा रही। पशुपालन विभाग ने पशु बीमा पॉलिसी से जुड़े काम किए। बीमा क्लेम के मामलों का निस्तारण किया। ग्रामीणों ने चरागाह भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत रखी। खेतों के रास्तों पर अतिक्रमण की बात कही। किसानों ने खेतों तक आने-जाने के रास्ते अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। शिविर में पंचायत प्रशासक प्रतिनिधि राजेंद्र नागर, ग्राम विकास अधिकारी देवेंद्र नागर आदि ने ग्रामीणों को पट्टे भी वितरित किए।

बारां के व्यापारियों को अब रेलवे से कम लागत में अपने माल को सुरक्षित भेजने की सुविधा मिलेगी

बारां | शहर के रेलवे स्टेशन के पास स्थित गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (बीजीपीएस) ने अपने टर्मिनल से गुरुवार को पहली डोमेस्टिक कंटेनर रैक का शुभारंभ किया। यह टर्मिनल रेलवे के गति शक्ति जीसीटी पॉलिसी के तहत स्केलर ग्रुप के स्वामित्व में है और पूरे दक्षिण-पूर्व राजस्थान का पहला मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स टर्मिनल है, जो दो रेल लाइनों, वेयरहाउस और साइलों की सेवा प्रदान कर रहा है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि टर्मिनल से पहली कंटेनर रेक दक्षिण भारत में बैंगलोर के लिए रवाना की गई। कंपनी अपने इस टर्मिनल से आने वाले समय में लगातार कंटेनर ट्रेनों का परिचालन करने जा रही है, जो इस क्षेत्र के व्यापारियों और माल को देश के विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ेगी। इस सुविधा से व्यापारियों को कम लागत और अपने माल को सुरक्षित तरीके से अंतिम गंतव्य पर भेजने की सुविधा मिलेगी। पहली कंटेनर ट्रेन का शुभारंभ पश्चिम मध्य रेलवे, कोटा मंडल (सीनियर डीसीएम) के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने किया। इस अवसर पर स्केलर ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भाग्यमनी सिंह, टर्मिनल प्रोजेक्ट प्रबंधक राकेश कुमार, सेंट्रल वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन, आईटीसी कंपनी और ट्रेड के कई लोग उपस्थित थे।

अनुपयोगी व नकारा सामानों की हुई खुली नीलामी

बारां | अतिरिक्त कलेक्टर भंवरलाल जनागल की अध्यक्षता व लेखाधिकारी, कलेक्ट्रेट, कोषाधिकारी व नाजिर की सदस्यता में गुरुवार दोपहर 3 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्ट्रेट के अनुपयोगी एवं नकारा सामानों की खुली नीलामी बोली लगाई गई। जिसकी बोली 2 लाख 38 हजार 500 रुपए से शुरू हुई। 7वें राउंड की नीलामी बोली राशि 2लाख 43 हजार 500 रुपए पर समाप्त हुई। खुली नीलामी बोली में 46 जीएसटी फर्मों ने भाग लिया।

5 मौतों के बाद जागा प्रशासन:डेढ़ किमी में न स्पीड लिमिट, ना ही ट्रैफिक मर्ज के संकेत; बसों के अवैध स्टॉपेज से हादसों का खतरा

जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस-वे पर दो दिन में 5 मौतों के बाद प्रशासन सड़क सुरक्षा की खामियां तलाशने में जुटा है। कलेक्टर ने पांच विभागों की संयुक्त टीम बनाकर हादसों के कारणों और सुधार के सुझावों पर पांच दिन में रिपोर्ट मांगी है। इस बीच भास्कर ने गुरुवार को पीडब्ल्यूडी के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और रोड इंजीनियरिंग एक्सपर्ट सीताराम शर्मा के साथ 200 फीट चौराहे से कमला नेहरू पुलिया तक करीब डेढ़ किमी हिस्से का पैरेलल निरीक्षण किया। पड़ताल में सामने आया कि जिस हिस्से पर रोज हजारों वाहन गुजरते हैं, वहां बुनियादी सड़क सुरक्षा इंतजाम तक अधूरे हैं। न स्पीड लिमिट के बोर्ड हैं, न ट्रैफिक मर्ज के संकेत। कई जगह सर्विस रोड और मुख्य सड़क के बीच गैप इतना चौड़ा है कि वाहन अचानक हाई-स्पीड ट्रैफिक के सामने आ जाते हैं। बस संचालकों ने सड़क किनारे अवैध स्टॉपेज बना लिया है, जहां सवारियां उतारी-बैठाई जा रही हैं। भास्कर ने रोड इंजीनियरिंग एक्सपर्ट के साथ किया घटनास्थल का निरीक्षण, 200 फीट चौराहे से कमला नेहरू पुलिया तक मिली ये 5 बड़ी तकनीकी खामियां 1. जंक्शन पर अचानक सामने आ रहे वाहन 200 फीट चौराहे और एक्सप्रेस-वे के जंक्शन पर दोनों सड़कों का ट्रैफिक मिल रहा है। यहां ट्रैफिक मर्ज का साइन बोर्ड और ब्लिंकर नहीं। वाहनों के लिए सड़क का मार्जिन काफी चौड़ा है। 2. डेढ़ किमी क्षेत्र में वाहन स्पीड के साइन बोर्ड ही नहीं डेढ़ किमी लंबे पूरे हिस्से में कहीं भी वाहनों की स्पीड लिमिट का बोर्ड नहीं है, जबकि यह घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां एक्सप्रेस-वे से उतरने के बाद वाहनों की गति कम कराना आवश्यक है। 3. होटल अमारा के सामने गैप ज्यादा, हादसे हो रहे होटल अमारा पैलेस और हाईवे किंग के सामने सर्विस रोड और मुख्य सड़क के बीच अत्यधिक चौड़ा गैप भी हादसों की वजह बन रहा है। 4. बीच रास्ते में ही बसें रुक रही, सवा​री बैठा रहे क्षेत्र में दुर्घटना संभावित क्षेत्र, नो-पार्किंग और नो-स्टॉपेज चेतावनी बोर्ड नहीं हैं। बस संचालकों ने अवैध स्टॉपेज बना लिया है। सड़क किनारे सवारियां बैठाई और उतारी जा रही हैं। 5. कट नहीं, फिर भी साइन बोर्ड, यूटर्न निषेध एक्सप्रेस-वे पुलिया से उतरते ही कट का साइन बोर्ड लगा है, जबकि पुलिया से कमला नेहरू पुलिया तक कोई कट नहीं है। ऐसे में बोर्ड वाहन चालकों को भ्रमित करता है। यहीं यू-टर्न निषेध का बोर्ड भी है, लेकिन हर मिनट वाहन टर्न ले रहे। }

आमजन को सर्पदंश से जागरूक और सतर्क रहने की अपील

बारां | जिले में मानसून की शुरूआत के साथ सर्पदंश के मामले सामने आने की संभावना को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने आमजन से जागरूक व सतर्क रहने की अपील की है। ताकि समय रहते सर्पदंश वाले व्यक्ति की जान बचाई जा सके। क्योंकि बारिश के मौसम में बहता हुआ पानी बिलों और निचले इलाकों में पहुंचता है। इससे सर्प व अन्य जीव बाहर आ जाते हैं। इस दौरान मनुष्य के संपर्क में आने पर सर्पदंश की घटनाएं होती हैं। सीएमएचओ डॉ. जगदीश कुशवाह ने बताया कि सर्पदंश के बाद समय पर उपचार नहीं मिलने से पीड़ित की मौत हो सकती है। सर्पदंश की स्थिति में 30 मिनट से एक घंटे का समय महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पीड़ित अस्पताल पहुंच जाए और उचित चिकित्सा मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। सर्पदंश के पीड़ित को तुरंत नजदीकी पीएचसी, सीएचसी या अस्पताल लेकर पहुंचे। झाड़-फूंक, टोटका या अन्य अंधविश्वासों में नहीं पड़ना चाहिए। सर्पदंश के मामलों में उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उप जिला अस्पताल, जिला अस्पताल में विष रोधी इंजेक्शन (एंटी स्नैक वेनम) पर्याप्त मात्रा उपलब्ध करवा दिए गए हैं। इनसे पूरी तरह से उपचार संभव है। सर्पदंश की परिस्थिति में सबसे पहले नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर पहुंच कर चिकित्सक से परामर्श लें। जिससे सही समय पर उपचार किया जा सके।

3 विभागों के समन्वय से फाइनल होगी नीति:53 हजार गांवों को हर दिन एक घंटा पानी देने की बनेगी नीति

राजस्थान के 41 जिलों के 53 हजार गांवों को रोज एक घंटा पानी सुनिश्चित करने, सप्लाई को निर्बाध चलाने को लेकर नई संशोधित नीति लाई जा रही है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों की सारी पेयजल योजनाओं को इस नीति के तहत ही संचालित किया जाएगा। हर घर को बाहर से पानी लाने की बजाय सीधे नल से पानी सुनिश्चित करने को नीति बनाने पर काम हो रहा है। इसके तहत उपलब्ध जल का घर घर तक संधारण, प्रसारण रोजाना कैसे हो, इस पर फोकस है। इसके तहत करीब 95 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को शुद्ध नल का जल सप्लाई सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है। सीएस ने पेयजल योजनाओं के संचालन एवं संधारण की व्यापक नीति को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए अफसरों को कहा है। इधर, प्रदेश के 95 लाख घरों तक नल का जल पहुंचाने के लिए नई नीति को 3 विभाग अंतिम रूप देंगे। इनमें पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, जलदाय विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों को मिलकर फाइनल करना है। तीनों के समन्वय से संशोधित नीति को आगे बढ़ाने पर सीएस का फोकस है। 25 लाख आदिवासी परिवारों को पानी का अलग प्लान प्रदेश के करीब 25 आदिवासी परिवारों को घर घर पानी को लेकर सीएस अलग प्लान बनवा रहे हैं। उन्होंने जनजाति विकास मंत्रालय से लेकर जलदाय विभाग को मिलकर अलग प्लान बनाने को कहा है। ग्रामीण परिवार होने के बावजूद आदिवासी बेल्ट की भौगोलिक परिस्थितियां अलग होने और नल कनेक्शन में आ रही परेशानियों को दूर करने का प्लान बन रहा है। 100 करोड़ से बड़ी योजना को खुद सीएस देखेंगे राजस्थान में 970 करोड़ रुपए का जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाला होने के बाद अब राजस्थान की जेजेएम की 100 करोड़ रुपए या इससे अधिक लागत की योजनाओं पर मुख्य सचिव वी श्रीनिवास सीधे नजर रखेंगे। सीएस ने अफसरों से 100 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की नियमित मानिटरिंग करने को कहा। सीएस ने जेजेएम अफसरों से हर घर जल कनेक्शन के प्रमाणित डेटा मांगे। कितने घरों के कनेक्शन जांच के बाद प्रमाणित हुए कि पानी पहुंच रहा है, इसकी रिपोर्ट मांगी है।

क्षतिग्रस्त पुलिया ने बढ़ाई वाहन चालकों की मुश्किलें

राजपुर| कस्बे के समीप तेलनी गांव से हाड़ौता गांव की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर स्थित नाले की पुलिया लंबे समय से क्षतिग्रस्त हो रही है। इस कारण ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार हर साल बारिश में पुलिया पर बड़ा गड्ढा हो जाता है। फिलहाल लोग पुलिया की एक साइड से तो निकल जाते हैं, लेकिन भारी वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। जिम्मेदार अधिकारी पुलिया की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं हैं। क्षेत्र के भगवान सिंह मेहता, गजानंद मेहता और कन्हैयालाल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि क्षतिग्रस्त पुलिया के कारण हादसा होने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से पुलिया की मरम्मत कराने की मांग की है।

आदेश 3 माह का, आवंटन एक माह का, राशन दुकानों पर रोज बढ़ रही तकरार

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत जुलाई में ही अगस्त और सितंबर का गेहूं भी वितरित करने के मुख्यालय के आदेश ने जिले की राशन व्यवस्था को असमंजस में डाल दिया है। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के 58,463 राशन कार्डों से जुड़े 2 लाख 34 हजार 288 लाभार्थी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने 2 जुलाई को आदेश जारी कर अगस्त और सितंबर के लिए आवंटित गेहूं का वितरण जुलाई के वितरण के साथ-साथ करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पोस मशीन और ऑनलाइन पोर्टल पर भी आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। जिले की अधिकांश उचित मूल्य दुकानों को अभी तक केवल जुलाई का ही गेहूं आवंटित हुआ है। दूसरी ओर पोस मशीन में अगस्त व सितंबर का वितरण करने का विकल्प भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में लाभार्थी तीन माह का राशन लेने दुकानों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन दुकानदारों के पास अतिरिक्त स्टॉक नहीं होने से उन्हें सिर्फ जुलाई का गेहूं ही दिया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि रोजाना राशन दुकानों पर उपभोक्ताओं और डीलरों के बीच बहस और नोकझोंक हो रही है। विभाग ने 2 जुलाई को जारी आदेश में पहले जारी किए गए 11 जून के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि अगस्त और सितंबर के लिए आवंटित गेहूं का वितरण जुलाई के साथ ही किया जाए, ताकि समय पर उठाव और वितरण पूरा हो सके। आदेश में सभी जिलों को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने और पोस मशीन में आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए थे। मशीन में विकल्प, लेकिन गोदाम खाली : राशन डीलरों का कहना है कि विभाग ने तकनीकी व्यवस्था तो पहले ही कर दी। पोस मशीन में अगस्त और सितंबर का विकल्प खुल गया है, लेकिन गोदाम से केवल जुलाई का गेहूं ही मिला है। ऐसे में मशीन में विकल्प दिखाई देने के बावजूद वितरण संभव नहीं है। डीलरों के अनुसार, जैसे ही उपभोक्ता अंगूठा लगाते हैं, मशीन में तीनों माह का विकल्प दिखाई देता है। इससे लाभार्थियों को लगता है कि तीन माह का राशन उपलब्ध है। जब दुकानदार उन्हें बताते हैं कि अतिरिक्त स्टॉक नहीं आया है तो कई लोग इसे बहाना समझते हैं और विवाद की स्थिति बन जाती है। उचित मूल्य दुकान संचालकों का कहना है कि विभाग के आदेश का पालन करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना आवंटन के तीन माह का वितरण कैसे किया जाए। उनका कहना है कि यदि गोदाम से जुलाई, अगस्त और सितंबर तीनों माह का स्टॉक एक साथ मिलता तो उसी दिन से तीन माह का गेहूं वितरित कर दिया जाता। फिलहाल उनके पास केवल जुलाई का स्टॉक है। डीलरों का कहना है कि अतिरिक्त आवंटन कब मिलेगा, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। लाभार्थी रोज सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन दुकानदारों के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। शहरी क्षेत्र में 20,708 राशन कार्ड व 88,333 लाभार्थी। ग्रामीण क्षेत्र 37 हजार 755 राशन कार्ड, 1 लाख 45 हजार 955 लाभार्थी। कुल राशन कार्ड 58 हजार 463, कुल लाभार्थी 2 लाख 34 हजार 288 है। वहीं जुलाई माह गेहूं आवंटन शहरी क्षेत्र के लिए 4 लाख 39 हजार 950 किलोग्राम व ग्रामीण क्षेत्र के लिए 7 लाख 34 हजार 550 किलोग्राम सहित कुल आवंटन 11,74,500 किलोग्राम (11.74 लाख किलो) हुआ है।

मामोनी में मोबाइल नेटवर्क ठप, 10 डायल पर लगती है एक कॉल

कस्बे सहित आसपास के खांडा सहरोल, बिची, मोहनपुर गांवों के ग्रामीण कई महीनों से मोबाइल नेटवर्क की समस्या झेल रहे हैं। कॉल ड्रॉप हो रहे हैं। इंटरनेट बंद रहता है। इमरजेंसी में भी संपर्क नहीं हो पा रहा। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि 5जी, 4जी के नाम पर 2जी भी नहीं चल रहा। ग्रामीणों के मुताबिक 10 बार डायल करने पर 1 बार कॉल कनेक्ट होती है। कॉल बीच में कट जाती है। इंटरनेट ठप होने से ऑनलाइन क्लास रुक गई है। यूपीआई पेमेंट नहीं हो रहे। आधार अपडेट का काम भी अटका है। गांव से 1 किमी दूर टॉवर है, जिसके चलते घर के अंदर नेटवर्क नहीं आता। हल्की बारिश में सभी कंपनियों के सिग्नल गायब हो जाते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत छात्रों को हो रही है। ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पा रहे। क्लास मिस हो रही है। किसानों को मंडी भाव देखने में परेशानी है। पीएम किसान, ई-केवाईसी नहीं कर पा रहे। महिलाएं 108, 100 जैसी इमरजेंसी सेवाओं पर कॉल नहीं कर पा रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि यूपीआई और ऑनलाइन पेमेंट ठप होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है।

वर्षों पुराना सहखातेदारी भूमि विवाद सहमति से हुआ समाप्त

ग्रामीण सेवा शिविरों के तहत ग्राम पंचायत भूरी पहाड़ी में शिविर में वर्षों से लंबित एक महत्वपूर्ण राजस्व प्रकरण का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को राहत दी गई। शिविर में परिवादी रूगनाथ पुत्र बजरंगा मीना एवं हरि पुत्र बजरंगा मीना के मध्य सहखातेदारी कृषि भूमि के विभाजन का मामला प्रस्तुत किया गया। यह विवाद लंबे समय से लंबित था, जिससे दोनों पक्षों को राजस्व अभिलेखों एवं भूमि उपयोग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। शिविर में उपस्थित खण्डार उपखण्ड के नायब तहसीलदार पुष्कर सिंह ने दोनों पक्षों की सहमति से प्रकरण का त्वरित परीक्षण कर सहखातेदारी भूमि के विभाजन की कार्रवाई मौके पर ही पूर्ण की गई। संबंधित खाता संख्या 352, कुल रकबा 22.16 बीघा भूमि का विधिवत बंटवारा कर आदेश की प्रति दोनों पक्षों को शिविर में ही उपलब्ध करा दी गई। इस त्वरित कार्रवाई से वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ तथा दोनों पक्षों ने राज्य सरकार की ग्रामीण सेवा शिविर पहल की सराहना करते हुए प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिविरों के माध्यम से आमजन की समस्याओं का समयबद्ध एवं पारदर्शी समाधान संभव हो रहा है।