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इंग्लैंड के खिलाफ भारत लगातार चौथी वनडे सीरीज जीतने उतरेगा:दूसरा मुकाबला आज; कार्डिफ में 15 साल से नहीं हारी टीम इंडिया

भारत के पास इंग्लैंड के खिलाफ लगातार चौथी वनडे सीरीज जीतने का मौका है। टीम इंडिया ने 2021 में घर पर 2-1, 2022 में इंग्लैंड में 2-1 और 2025 में भारत में 3-0 से सीरीज अपने नाम की थी। तीन मैचों की इस सीरीज में पहला वनडे 6 विकेट से जीतकर टीम 1-0 की बढ़त बना चुकी है। कार्डिफ में भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा मुकाबला खेला जाएगा। मैच शाम 5:30 बजे शुरू होगा। इस मैदान में टीम इंडिया पिछले 15 साल से वनडे नहीं हारी है। भारत को यहां आखिरी हार 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ मिली थी। इसके बाद उसने 2013 चैंपियंस ट्रॉफी में साउथ अफ्रीका और श्रीलंका को हराया, जबकि 2014 में इंग्लैंड को 133 रन से मात दी थी। 5 फैक्टर में प्रीव्यू पढ़िए… 1. भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पिछले 6 वनडे जीते दोनों टीमों के बीच 111 मुकाबले खेले गए हैं। भारत ने 62 जीते हैं। इंग्लैंड को 44 में जीत मिली है। 2 मुकाबले टाई और 3 बेनतीजा रहे। भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पिछले 6 मुकाबले जीते हैं। कार्डिफ में इंग्लैंड का रिकॉर्ड बेहतर रहा है। टीम ने 14 में से 10 मुकाबले जीते हैं। 2. गिल और प्रसिद्ध फॉर्म में, बुमराह की वापसी से गेंदबाजी मजबूत 3. रूट ने इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए 4. पिच और वेदर रिपोर्ट 5. दोनों टीमों में क्या बदलाव हो सकता है? पॉसिबल प्लेइंग-11 भारत: रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, अक्षर पटेल, केएल राहुल (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, जसप्रीत बुमराह, गुरनूर बरार/अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा। इंग्लैंड: बेन डकेट, जैकब बेथेल, जो रूट, हैरी ब्रूक (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), सैम करन, विल जैक्स, जोफ्रा आर्चर, जोश टंग/ब्रायडन कार्स, साकिब महमूद, आदिल राशिद।

गुप्त नवरात्रि 23 जुलाई तक:देवी सती के क्रोध से प्रकट हुई थीं दस महाविद्याएं, देवी पूजा और मंत्र जप के साथ ध्यान करने से दूर होता है तनाव

15 जुलाई (आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा) से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। यह उत्सव 23 जुलाई तक रहेगा। इन दिनों में तंत्र साधना से जुड़े लोग देवी सती की दस महाविद्याओं की कृपा पाने की कामना से विशेष साधनाएं करते हैं। देवी सती के क्रोध से प्रकट हुई थीं दस महाविद्याएं उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, दस महाविद्याओं का संबंध देवी सती से है। मान्यता है कि देवी सती के क्रोध से दस महाविद्याएं प्रकट हुई थीं। इन महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। गुप्त नवरात्रि में इन्हीं दस महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए साधना की जाती है। माना जाता है कि इनकी आराधना से विशेष आध्यात्मिक शक्ति और मन की शांति प्राप्त होती है। दक्ष यज्ञ से जुड़ी है दस महाविद्याओं के प्रकट होने की कथा पौराणिक कथा है कि भगवान शिव का विवाह देवी सती से हुआ था। देवी सती के पिता प्रजापति दक्ष भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे। वे कई बार भगवान शिव का अपमान करने का प्रयास करते थे। एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया। इसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया गया, लेकिन भगवान शिव और देवी सती को निमंत्रण नहीं दिया गया। जब देवी सती को इस बात की जानकारी मिली, तो उन्होंने भगवान शिव से यज्ञ में जाने की इच्छा जताई। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि प्रजापति दक्ष ने हमें आमंत्रित नहीं किया है, इसलिए हमारे लिए वहां जाना उचित नहीं होगा। भगवान शिव के समझाने के बाद भी देवी सती अपने पिता के घर जाने की जिद पर अड़ी रहीं। उन्होंने कहा कि पिता के घर जाने के लिए संतान को निमंत्रण की जरूरत नहीं होती। बार-बार निवेदन करने के बाद भी भगवान शिव ने सहमति नहीं जताई, तो देवी सती क्रोधित हो गईं। मान्यता है कि इसी क्रोध से दस महाविद्याएं प्रकट हुईं। देवी सती का यह रूप देखकर भगवान शिव ने उन्हें यज्ञ में जाने से नहीं रोका। इसके बाद देवी सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पहुंचीं। वहां प्रजापति दक्ष ने देवी सती के सामने ही भगवान शिव का अपमान करना शुरू कर दिया। पति का अपमान सहन नहीं कर पाने के कारण देवी सती ने यज्ञ कुंड में प्रवेश कर अपनी देह का त्याग कर दिया। साधना में नियमों का पालन जरूरी गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना विशेष नियमों के साथ करनी चाहिए। साधना में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इसलिए ऐसी साधनाएं तंत्र विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में करना उचित माना जाता है। इन दिनों में सामान्य भक्तों के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करने, सूर्यदेव को अर्घ्य देने और घर के मंदिर में पूजा करने का महत्व बताया गया है। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से करने के बाद देवी मां की पूजा करनी चाहिए। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के समय मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है। गर्मी कम होने लगती है और बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। इस दौरान खान-पान में सावधानी रखना जरूरी है। बारिश के मौसम में पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है, इसलिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए। अधिक तला-भुना या ऐसा भोजन करने से बचना चाहिए, जिससे गैस और अपच जैसी समस्या हो सकती है। ध्यान और मंत्र जप से दूर होता है तनाव गुप्त नवरात्रि में ध्यान करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि ध्यान से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार और तनाव दूर होते हैं। ध्यान के लिए घर के मंदिर में देवी पूजा करने के बाद शांत स्थान पर आसन लगाकर बैठ सकते हैं। आंखें बंद करके देवी मां का स्मरण करें और अपना ध्यान दोनों आंखों के बीच स्थित आज्ञा चक्र पर केंद्रित करें। इस दौरान सामान्य गति से सांस लेते हुए दुं दुर्गायै नम: मंत्र का जप किया जा सकता है।

जगन्नाथ रथयात्रा आज:87 दिन में 220 कारीगर बनाते हैं तीन रथ, यात्रा के बाद 3 लाख रूपए तक बिकता है एक पहिया

ओडिशा के पुरी में आज भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकलेगी। भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर आएंगे। तीनों देवता अलग-अलग रथों में सवार होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे। लोक परंपरा में गुंडिचा मंदिर को भगवान की मौसी का घर कहा जाता है।
देवता गुंडिचा मंदिर में सात दिन रहेंगे। 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा से मुख्य मंदिर लौटेंगे। इसके बाद भगवान दो दिनों तक मंदिर के बाहर रथ पर ही रहेंगे और 27 को मंदिर में प्रवेश करेंगे। कुछ दिन बाद मंदिर प्रशासन रथों को खोलने की तारीख तय करेगा। तब रथ के कुछ हिस्से बेचे जाएंगे। 2025 में भगवान जगन्नाथ के रथ के एक पहिए की न्यूनतम कीमत 3 लाख रुपए थी। बलभद्र के रथ के पहिए की कीमत 2 लाख और सुभद्रा के रथ के पहिए की 1.5 लाख रुपए रखी गई थी। वसंत पंचमी पर लकड़ियों की पूजा, रामनवमी पर लट्ठों की चिराई और अक्षय तृतीया से रथ बनने शुरू होते हैं रथ बनाने के लिए ओडिशा वन विभाग मंदिर को बिना कीमत लकड़ियां देता है। सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से 13 तरह के पेड़ों की लकड़ियों से रथ बनते हैं। इनमें फासी, धौरा, आसन, मोई, सिमिली, साल, गम्भारी, कदंब और देवदारु समेत अन्य प्रजातियां होती हैं। भविष्य में रथ बनाने के लिए जरूरी लकड़ियों की कमी न हो, इसलिए ओडिशा सरकार जंगल प्रोजेक्ट भी चला रही है। बसंत पंचमी पर लकड़ियों की पूजा होती है। इसके बाद रामनवमी पर पूजा के बाद तीन धौरा लट्ठों की चिराई से काम शुरू होता है। नक्शे के बजाय पीढ़ियों पुरानी माप से रथ बनते हैं, खास छड़ी और रस्सी से नापते हैं हर हिस्सा कारीगर पहले पहिए बनाते हैं। इसके बाद नीचे से ऊपर की ओर रथ का ढांचा खड़ा करते हैं। नाप के लिए आधुनिक फीते के साथ पीढ़ियों से चली आ रही करीब 20 इंच की खास छड़ी और रस्सी का इस्तेमाल होता है। हर साल तय डिजाइन और पुराने अनुपात के हिसाब से रथ बनते हैं। इसके लिए किसी बड़े इंजीनियरिंग नक्शे की जरूरत नहीं होती। इन सेवाओं से जुड़ा ज्ञान पीढ़ियों से तय परिवारों में आगे बढ़ता है। नई पीढ़ी रथखला में बड़े कारीगरों के साथ काम करके यह हुनर सीखती है। तीनों रथ तैयार होने के बाद सरकारी इंजीनियर उनकी अंतिम सुरक्षा जांच करते हैं। वे पहियों, धुरी, लकड़ी के जोड़ और पूरे ढांचे को देखते हैं। फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही रथों को यात्रा के लिए तैयार माना जाता है। यात्रा में रथ तीन रहते हैं, लेकिन उनमें प्रतिमाएं चार होती हैं रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के अलावा भगवान सुदर्शन (चक्र) की भी मूर्ति होती हैं। रथयात्रा वाले दिन देवताओं को मंदिर से बाहर आगे-पीछे झुलाते हुए रथों तक ले जाते हैं। इस परंपरा को पहांडी कहते हैं। सबसे पहले भगवान सुदर्शन मंदिर से बाहर आते हैं। फिर बलभद्र, सुभद्रा और आखिर में भगवान जगन्नाथ आते हैं। इसके बाद पुरी के गजपति महाराज सोने की झाड़ू से तीनों रथ साफ करते हैं और सुगंधित जल छिड़कते हैं। इस सेवा को छेरा–पहरा कहते हैं। गजपति महाराज मंदिर के सबसे बड़े सेवक माने जाते हैं। यात्रा में सबसे आगे बलभद्र का रथ चलता है। फिर सुभद्रा का और आखिरी में भगवान जगन्नाथ का रथ होता है। हजारों लोग मोटी रस्सियों से रथों को करीब दो किलोमीटर खींचकर गुंडिचा मंदिर तक ले जाते हैं। यात्रा के बाद 3 लाख रुपये तक बिकता है एक पहिया, लगभग 20 दिनों में खुल जाते हैं तीनों रथ रथयात्रा पूरी होने के बाद सिंहद्वार के सामने बड़ा डंडा पर खड़े रथ तुरंत नहीं खोले जाते। इसकी तारीख मंदिर प्रशासन तय करता है और पारंपरिक भोई सेवक यह काम करते हैं। सबसे पहले रथों में लगे लकड़ी के घोड़े, सारथी और रथ के चारों ओर लगी देवी-देवताओं की मूर्तियां उतारकर सुरक्षित रखी जाती हैं। ये हर साल नई नहीं बनाई जातीं। रथों से निकाली गई लोहे की कीलें मंदिर प्रशासन के ऑफिस में जमा की जाती हैं। पहिए और नक्काशी वाले खास हिस्से अलग गोदाम में सुरक्षित रखे जाते हैं।

स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:हमारे विचार सकारात्मक, वाणी मीठी और संयमित होनी चाहिए, सभी लोगों के साथ अपनापन रखें

हमारे विचार सकारात्मक, वाणी मीठी और संयमित होनी चाहिए। व्यक्तित्व आकर्षक और सरल होना चाहिए। हमारी हर बात, व्यवहार, हाव-भाव और अभिव्यक्ति स्वाभाविक होने के साथ ही अर्थपूर्ण भी हो। मन में हमेशा अच्छे संकल्प रखें। जब हम अपने स्वभाव के अनुसार रहते हैं, तो अधिक सहज, शांत और प्रेमपूर्ण बनते हैं। हमें अपने व्यवहार में लचीलापन रखना चाहिए और हर परिस्थिति के अनुसार खुद को सकारात्मक सोच के साथ ढालना चाहिए। जिद, हठ और दुराग्रह से बचना चाहिए। सभी लोगों के साथ प्रेम और अपनापन रखें। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए जीवन में श्रेष्ठता कैसे आता है? आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।

कथा- एक पिता के दो बेटे, एक सफल, दूसरा बर्बाद:समस्याओं से भागने के बजाय उन्हें स्वीकार करके समाधान खोजें, जो व्यक्ति धैर्य रखता है, वही सफल होता है

एक कथा है, पुराने समय में एक छोटे से गांव में एक व्यक्ति को नशे की बुरी आदत लग गई। वह अपना अधिकतर समय नशे में बिताता था। घर की जिम्मेदारियों से वह दूर रहता और इस वजह से उसके परिवार में अक्सर तनाव का माहौल बना रहता था। उसकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। उसके दो छोटे बेटे थे, जो अपने पिता की आदतों और घर के वातावरण को देखते हुए बड़े हो रहे थे। समय बीतता गया और जब दोनों बेटे थोड़े बड़े हुए तो उनके पिता की भी मृत्यु हो गई। पिता के जाने के बाद दोनों भाइयों के सामने अपने-अपने जीवन को लेकर कई परेशानियां थीं, लेकिन दोनों ने अपने अनुभवों को अलग-अलग तरीके से देखा। बड़ा बेटा अपने पिता की आदतों से प्रभावित हुआ। उसने भी नशे को अपना सहारा बना लिया। धीरे-धीरे उसका जीवन भी उसी दिशा में जाने लगा, जिस दिशा में उसके पिता का गया था। उसकी आर्थिक स्थिति खराब होती गई और समाज में उसका सम्मान भी कम होने लगा। वहीं, दूसरी ओर छोटा बेटा उसी घर के माहौल को देखकर कुछ अलग सीखा था। उसने अपने पिता की गलत आदतों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि जीवन की सीख बना लिया। उसने मन में ठान लिया कि उसे अपने पिता जैसी जिंदगी नहीं जीनी है। उसने नकारात्मक परिस्थितियों से अपना ध्यान हटाकर पढ़ाई और मेहनत पर ध्यान लगाया। समय के साथ उसकी मेहनत रंग लाई। वह पढ़-लिखकर एक बड़ा अधिकारी बन गया। उसके पास सुख-सुविधाएं थीं, समाज में सम्मान था और लोग उसकी सफलता की प्रशंसा करते थे। जब लोगों ने देखा कि एक ही परिवार के दो बच्चों का जीवन इतना अलग हो गया है, तो उन्होंने दोनों भाइयों से इसका कारण पूछा। बड़े बेटे ने कहा, “मेरी यह हालत मेरे पिता की वजह से हुई है। मैंने उन्हें हमेशा नशा करते देखा और वही आदतें अपना लीं।” इसके बाद लोगों ने छोटे बेटे से पूछा, “तुम इतनी सफलता तक कैसे पहुंचे?” छोटे बेटे ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं भी अपने पिता की वजह से ही सफल हुआ हूं। मैंने उनके जीवन से यह सीखा कि मुझे क्या नहीं करना है। मैंने उनके गलत रास्ते को देखकर सही रास्ता चुनने का फैसला किया। मैंने मेहनत और शिक्षा को अपना साथी बनाया।” यह सुनकर सभी लोग समझ गए कि परिस्थिति नहीं, बल्कि परिस्थिति को देखने का नजरिया इंसान का भविष्य तय करता है। इस कथा की सीख यही है कि जीवन में अच्छी और बुरी दोनों तरह की बातें होती रहती हैं। सकारात्मक सोच रखने वाला व्यक्ति कठिनाइयों में भी अवसर खोज लेता है, जबकि नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अवसरों में भी समस्याएं ढूंढ लेता है। हमारा नजरिया ही हमारी सफलता और खुशी का आधार बनता है। प्रसंग की सीख हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप में कठिन समय से गुजरना पड़ता है। समस्याओं से भागने के बजाय उन्हें स्वीकार करके समाधान खोजने की आदत बनाएं। जो व्यक्ति मुश्किल समय में धैर्य रखता है, वही आगे बढ़ता है। हमारे विचार ही हमारे कार्यों को प्रभावित करते हैं। अगर मन में हमेशा डर, चिंता और असफलता के विचार रहेंगे, तो आत्मविश्वास कम होगा। सकारात्मक विचारों को अपनाने से ऊर्जा और उत्साह बढ़ता है। असफलता जीवन का अंत नहीं होती। हर गलती हमें कुछ नया सिखाती है। अपनी गलतियों को कमजोरी नहीं, बल्कि सुधार का अवसर मानें। जिन लोगों के साथ हम रहते हैं, उनकी सोच का असर हमारे जीवन पर पड़ता है। सकारात्मक और मेहनती लोगों के साथ रहने से हमारी सोच भी बेहतर होती है। बिना लक्ष्य के जीवन दिशाहीन हो सकता है। छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करने के लिए नियमित प्रयास करें। बीती हुई बातें वापस नहीं आतीं। पुराने दुखों और असफलताओं को बार-बार याद करने से वर्तमान प्रभावित होता है। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करें। जीवन में जो अच्छी चीजें हैं, उनके लिए आभार व्यक्त करें। आभार मानने की भावना मन को शांत और सकारात्मक बनाती है। अच्छा स्वास्थ्य सकारात्मक सोच के लिए जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद जीवन में ऊर्जा बनाए रखते हैं। हर व्यक्ति की परिस्थितियां और यात्रां अलग होती हैं, दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी प्रगति पर ध्यान दें। सफल लोग समस्याओं को रुकावट नहीं, बल्कि सीखने का अवसर मानते हैं। जीवन की हर चुनौती हमें मजबूत बनाने के लिए आती है। सकारात्मक सोच एक आदत है, जिसे लगातार अभ्यास से विकसित किया जा सकता है। जब हम अपने विचारों को नियंत्रित करना सीख लेते हैं, तो मुश्किल परिस्थितियों में भी आगे बढ़ सकते हैं।

अहमदाबाद रथयात्रा में हाथियों को पैर बांधकर लाया गया:पिछले साल 3 हाथी बेकाबू हुए थे; पुरी में सोने की झाड़ू से होगी रथों की सफाई

अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जा रही है। यात्रा में संदेशों वाली झांकियां भी शामिल हैं। इस बार हाथियों को पैर में जंजीरों से बांधकर लाया गया और खड़िया पोल पर आते ही लोगों को सड़क से हटा दिया गया। पिछले साल रथ यात्रा के दौरान 3 हाथी बेकाबू हो गए थे। सुबह जामालपुर जगन्नाथ मंदिर में सुबह 4 बजे मंगला आरती हुई। इसमें गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए। सुबह 7 बजे रथयात्रा निकली। सीएम भूपेंद्र पटेल और डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने सोने की झाड़ू से रथ के आगे सफाई कर यात्रा को रवाना किया। ओडिशा के पुरी में भगवानों को रथों पर विराजमान किया जाएगा। गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करेंगे। शाम 4 बजे श्रद्धालु 3 किमी दूर गुंडिचा मंदिर तक रथ खींचेंगे। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अहमदाबाद रथयात्रा की 3 तस्वीरें…

पुरी रथयात्रा में बारिश के बीच पहुंच रहे श्रद्धालु…. पहले जानिए 2 सबसे बड़ी रथ यात्राओं के बारे में रथयात्रा से जुड़ी हर अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

कर्नाटक में डॉक्टर की घर में हत्या, बेटा घायल मिला:पत्नी भी डॉक्टर; परिवार से कहा था- पति सो रहे, फिर बताया- बाहर गए हैं

कर्नाटक के धारवाड़ में बुधवार को 45 साल के डॉक्टर (एनेस्थीसिया विशेषज्ञ) किरण होन्नन्नावर की उनके फ्लैट में हत्या कर दी गई। उनका 8 साल का बेटा चाकू के घावों के साथ घायल मिला। बच्चे का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने डॉक्टर की पत्नी प्रियंका को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। प्रियंका आंखों की डॉक्टर हैं। पुलिस के मुताबिक, घटना एक हाई-सिक्योरिटी अपार्टमेंट में हुई, जिसमें डॉक्टर किरण अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहते थे। शुरुआती जांच में किसी बाहरी व्यक्ति के फ्लैट में घुसने के सबूत नहीं मिले हैं। घटना के समय घर में सिर्फ पति, पत्नी और उनका बेटा मौजूद थे। मामले का खुलासा तब हुआ, जब डॉ. किरण के परिजन पूरे दिन उनसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे। फिर भी बात नहीं हो पाई। परिजन फोन करते रहे, पत्नी देती रहीं अलग-अलग जवाब पुलिस के मुताबिक, पत्नी प्रियंका ने ससुरालवालों से पहले कहा कि पति आराम कर रहे हैं, बाद में बताया कि वह बाहर गए हैं। शाम तक बात नहीं होने पर परिजन फ्लैट पहुंचे। वहां डॉ. किरण एक कमरे में खून से लथपथ मृत मिले, जबकि दूसरे कमरे में उनका बेटा घायल हालत में पड़ा था। पुलिस ने बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। डॉ. किरण के परिजनों ने हत्या के लिए उनकी पत्नी पर आरोप लगाया है, लेकिन पुलिस ने अभी तक उनकी भूमिका की पुष्टि नहीं की है। मामले में सबअर्बन पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। पुलिस बोली- पत्नी सदमे में है, बार-बार बयान बदल रही हुबली-धारवाड़ के पुलिस आयुक्त एन. शशिकुमार ने बताया कि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि घटना किस क्रम में हुई। पत्नी सदमे में है और पूछताछ के दौरान अलग-अलग बयान दे रही है। पुलिस उसके बयानों की जांच कर रही है। साथ ही दोनों परिवारों से भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि हत्या की वजह पता चल सके। पुलिस अपार्टमेंट के CCTV फुटेज भी खंगाल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पड़ोसियों से किसी तरह के विवाद की जानकारी नहीं मिली है। पुलिस ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही हत्या की वजह और पूरी घटना का क्रम साफ हो सकेगा। शुरुआती जांच में मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा लग रहा है। पुलिस ने बच्चे की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों की भी पुष्टि नहीं की है। 22 जून: बेंगलुरु में इंजीनियर ने माता-पिता और छोटी बहन को मारा धारवाड़ की घटना से पहले भी कर्नाटक एक चर्चित ट्रिपल मर्डर केस को लेकर सुर्खियों में रहा। 22 जून को बेंगलुरु के केआर पुरम इलाके में 24 साल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्वेता एम. पर अपने माता-पिता और छोटी बहन की हत्या का आरोप लगा था। जांच में सामने आया कि इस वारदात में उसके लिव-इन पार्टनर जे. केनेथ की भी भूमिका थी। केनेथ को बाद में पुडुचेरी से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, श्वेता और केनेथ वारदात के बाद बाइक से पुडुचेरी भाग गए थे और एक होटल में ठहरे थे। पूरी खबर पढ़ें… भास्कर नॉलेज: कर्नाटक में हत्या के मामले घटे, लेकिन बेंगलुरु में बढ़े

बेटे ने पिता की 6 गोलियां मारकर हत्या की:150 करोड़ की प्रॉपर्टी चाहता था, मां लाश देख चीखी, कहा- तूने घर उजाड़ दिया

गाजियाबाद में 150 करोड़ की प्रॉपर्टी के विवाद में बेटे ने पिता की हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, बुधवार रात 12 बजे बेटे ने पिस्टल से पिता के चेहरे, सीने और पेट में 6 गोलियां मारीं। बेटा शराब पीकर घर आया था। पिता ने उसे डांट दिया। इसके बाद उसने वारदात को अंजाम दिया। पति का शव देखकर मां चीख पड़ी। बेटे से कहा- तूने पूरा घर उजाड़ दिया। वहीं, गोलियों की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बेटा भाग चुका था। आरोपी बेटा निखिल (32) प्रॉपर्टी अपने नाम कराने के लिए पिता हरिओम चौधरी (52) पर दबाव बना रहा था। हरिओम इसके लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि बेटा जमीन बेचकर शराब पी जाएगा। रात को भी जब पिता ने डांटा, तो झगड़ा बढ़ा और निखिल ने पिता की हत्या कर दी। आरोपी बेटे की तलाश में पुलिस की 4 टीमें लगाई गई हैं। घटना मोदीनगर थाना क्षेत्र की है। करीब 8 साल पहले निखिल ने अपने छोटे भाई नीशू को भी गोली मारी थी, लेकिन उसकी जान बच गई थी। 25 बीघा जमीन बेटे के नाम थी, पूरी प्रॉपर्टी लेना चाहता था हरिओम बुदाना गांव के रहने वाले थे। वह संपन्न किसान थे। मोदीनगर में उनके नाम पर 75 बीघा जमीन और दिल्ली-मेरठ रोड पर जीवन अस्पताल के सामने एक मार्केट है। उनकी कुल संपत्ति करीब 150 करोड़ रुपए बताई जा रही है। परिवार में पत्नी मीनाक्षी, बड़ा बेटा निखिल और छोटा बेटा नीशू हैं। दोनों बेटों की शादी नहीं हुई है। एसीपी भास्कर वर्मा ने बताया कि बड़ा बेटा निखिल 12 वीं तक पढ़ा है। शराब पीने का आदी है। इसी वजह से पिता से उसका अक्सर झगड़ा होता रहता था। उन्होंने निखिल को मार्केट में दुकानें और 25 बीघा जमीन दे रखी थी। लेकिन, वह पूरी प्रॉपर्टी अपने नाम कराना चाहता था। पिता से पहले हाथापाई की, फिर गोली मारी एसीपी ने बताया- बुधवार रात हरिओम चौधरी ने पत्नी और छोटे बेटे के साथ खाना खाया। उस समय बड़ा बेटा निखिल घर पर नहीं था। वह देर रात शराब पीकर घर पहुंचा। पिता ने शराब पीकर आने पर उसे डांट दिया। इस पर निखिल ने पिस्टल निकाल ली और पिता से गाली-गलौज करने लगा। इसके बाद दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया। शोर सुनकर हरिओम की पत्नी मीनाक्षी और छोटा बेटा नीशू भी वहां पहुंच गए। इसी दौरान हाथापाई हुई और निखिल ने पिता पर ताबड़तोड़ 6 गोलियां चला दीं। गोली लगते ही हरिओम फर्श पर गिर पड़े। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पड़ोसी बोले- शाही जिंदगी जीता था निखिल पड़ोसियों ने बताया कि निखिल की लाइफस्टाइल शाही रही है। वह बुलेट से चलता था। अक्सर अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने जाता था। यह बात मां मीनाक्षी और पिता हरिओम को पसंद नहीं थी। उन्हें लगता था कि घर की खेती की जितनी कमाई है, वह सब बेटा पार्टी में उड़ा रहा है। लेकिन, निखिल इतना गर्म-मिजाज था कि मां और छोटा भाई निशू भी उसको पलटकर जवाब नहीं देते थे। साल- 2018 में मां के डांटने पर जब निखिल का निशू से झगड़ा हुआ था, तो उसने भाई पर गोली चला दी थी। इस मामले में परिवार ने आपस में बैठकर समझौता कर लिया था। पुलिस में शिकायत नहीं की थी। एसीपी बोले- जल्द पकड़ा जाएगा आरोपी एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया- परिजनों ने जमीन विवाद की बात बताई है। हरिओम की पत्नी मीनाक्षी ने मोदीनगर में बेटे के खिलाफ हत्या की शिकायत दी है। पुलिस केस दर्ज कर सभी पहलुओं से जांच कर रही है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें बुलंदशहर में बीच सड़क डबल मर्डर, 15 मिनट तक फायरिंग, दो युवकों के सीने पर गोली मारी, कार चढ़ाई यूपी के बुलंदशहर में मंगलवार रात 9.30 बजे दो लोगों की हत्या कर दी गई। पैसों के लेनदेन को लेकर दो पक्षों में बीच सड़क विवाद हो गया। पहले दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। देखते ही देखते मारपीट होने लगी। फिर दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई। करीब 15 मिनट तक दोनों तरफ से फायरिंग होती रही। इसके बाद एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर कार चढ़ा दी। पूरी खबर पढ़ें

दिल्ली में सोनम वांगचुक के अनशन का 19वां दिन:18 दिन में 8.9kg वजन घटा; जबरन आहार देने की मांग पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का आज 19वां दिन है। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने और जरूरत पड़ने पर जबरन खाना (फोर्स-फीडिंग) देने के निर्देश देने की मांग की गई है। वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में शामिल हैं। वे नीट परीक्षा में गड़बड़ियों के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच बुधवार को सरकारी पक्ष की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई नहीं कर सकी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे गुरुवार के लिए सूचीबद्ध किया और मामले पर केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। सोनम वांगचुक के अनशन की 3 तस्वीरें… याचिका में वांगचुक को इमरजेंसी ट्रीटमेंट देने की मांग अभिजीत दिपके बोले- सरकार का रवैया क्रूर CJP ने आरोप लगाया कि छात्रों के लिए आवाज उठाने वाले वांगचुक को सरकार की ओर से सिर्फ खामोशी मिली है। CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार जवाबदेही से बच रही है और उसका रवैया क्रूर है। अमेरिका स्थित संगठन हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी वांगचुक की सेहत पर चिंता जताई है। संगठन ने पीएम मोदी से प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने, उनकी मांगों पर ठोस जवाब देने और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की अपील की है। 18 दिन में 8.9 किलो वजन घटा CJP के मुताबिक, अनशन के 18 दिनों में वांगचुक का वजन 8.9 किलो घटकर 57.15 किलो रह गया है। पार्टी का कहना है कि वांगचुक की हालत नाजुक बनी हुई है। बुधवार को उनका ब्लड प्रेशर 105/76, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन स्तर 97% दर्ज किया गया। डॉक्टरों के अनुसार वह पूरी तरह होश में हैं, लेकिन लगातार भूख हड़ताल से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। वांगचुक इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे। उन पर आरोप था कि अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए। सरकार ने हिंसा भड़काने का आरोप वांगचुक पर लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया। इरोम ने 16 साल तक अनशन किया, जानें ऐसी ही 5 हड़तालें देश में पहले भी कई नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर लंबी भूख हड़ताल कर चुके हैं। महात्मा गांधी से लेकर जी.डी. अग्रवाल तक कई लोगों ने अनशन का सहारा लिया। सबसे लंबी भूख हड़ताल का रिकॉर्ड इरोम शर्मिला के नाम है। इरोम शर्मिला ने मणिपुर से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाने की मांग को लेकर करीब 16 साल (2000-2016) तक भूख हड़ताल की थी। इस दौरान उन्हें जीवित रखने के लिए नाक के जरिए तरल आहार (फोर्स-फीडिंग) दिया जाता था। 3 हफ्ते से ज्यादा भूखा रहने पर दूसरे बॉडी पार्ट्स पर असर —————————- यह खबर भी पढ़ें… कॉकरोच पार्टी फाउंडर दीपके ने पुलिस के पैर पकड़े:जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की इजाजत मांगी, कहा- हड़ताली छात्रों को बारिश से बचाना है कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिसवालों के पैर पकड़े और हाथ जोड़े। वे टेंट लगाने की इजाजत मांग रहे थे ताकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बारिश से बचाया जा सके। दीपके ने इस घटना का वीडियो शेयर किया। पूरी खबर पढ़ें…

अर्जेंटीना लगातार दूसरे फुटबॉल वर्ल्डकप फाइनल में:इंग्लैंड को 2-1 से हराया; मेसी के पास पर फर्नांडिज और मार्टिनेज ने गोल किए

अर्जेंटीना लगातार दूसरे FIFA वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंच गया है। डिफेंडिंग चैंपियन ने दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराया। अर्जंटीना के लिए एंजो फर्नांडिज (55वें मिनट) और लोटारो मार्टिनेज (85वें मिनट) ने गोल किया। अर्जेंटीना ओवरऑल सातवीं बार फुटबॉल वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची है। इससे पहले टीम 1930, 1978, 1986, 1990, 2014 और 2022 में फाइनल में पहुंची थी। अब अर्जेंटीना फाइनल में स्पेन से भिड़ेगी। फाइनल मुकाबला 19 जुलाई की रात 12:30 बजे से न्यूजर्सी स्टेडियम में खेला जाएगा। फर्नांडिज का शानदार गोल, अर्जेंटीना ने की बराबरी मैच के 85वें मिनट में फर्नांडीज ने गोल कर अर्जेंटीना को 1-1 से बराबरी दिलाई। लियोनेल मेंसी ने एंजो फर्नांडिज को पास किया। फर्नांडिज ने करीब 25 गज की दूरी से शॉट लगाया। इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड ने जंप लगाया, लेकिन गेंद उनकी पहुंच से दूर टॉप कॉर्नर में जा पहुंची। अर्जेंटीना ने लगातार अटैक किए इससे पहले अर्जेंटीना ने 75वें और 77वें मिनट में लगातार दो बार मौके बनाए। 69वें मिनट में भी अर्जेंटीना के पास मौका था। मेसी ने कॉर्नर किक मारी। क्रॉस पर निकोलस गोंजालेज ने गोलपोस्ट के नजदीक से हेडर लगाया, लेकिन इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड ने दाईं ओर डाइव लगाकर गेंद को सेव किया। गार्डन ने गोल कर इंग्लैंड को बढ़त दिलाई मैच के 55वें मिनट में इंग्लैंड ने मिडफील्डर मॉर्गन रॉजर्स ने तेज मूव के बाद बाएं छोर से बॉक्स में शॉट लगाया। अर्जेंटीना की डिफेंस अपनी पोजिशन नहीं संभाल सकी। इसी समय एंथनी गॉर्डन ने गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में भिड़े मैच के तीसरे मिनट में इंग्लैंड के मिडफील्डर इलियट एंडरसन टैकल के बाद मैदान पर गिर पड़े। इसके बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी आमने-सामने आ गए और रेफरी को बीच-बचाव करना पड़ा। 37वें मिनट में भी लियोनेल मेसी पर एंडरसन ने फाउल किया। इस पर उन्हें येलो कार्ड दिखाया गया। हाफ टाइम के बाद भी दोनों टीमों के खिलाड़ी रेफरी के पास पहुंचे और मेसी काफी देर तक रेफरी से चर्चा करते नजर आए। 4 फोटोज… 32वें मिनट में इंग्लैंड को मिला सबसे बड़ा मौका इंग्लैंड को 32वें मिनट में जूड बेलिंघम पर फाउल होने के बाद बॉक्स के बाहर फ्री-किक मिली। डेक्लन राइस ने इनस्विंग क्रॉस बॉक्स में डाला, जिस पर जॉन स्टोन्स ने हेडर लगाया। हालांकि उनका हेडर नेट से टकराकर बाहर चला गया। पहले हाफ में दोनों टीमें बराबरी पर शुरुआती 25 मिनट तक इंग्लैंड ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और ज्यादा बॉल अर्जेंटीना की साइड में गई। एंथनी गॉर्डन, डेजेड स्पेंस और रीस जेम्स ने लगातार अटैक किया, लेकिन अर्जेंटीना के डिफेंस ने बचाव किया। इसके बाद अर्जेंटीना ने भी लय पकड़ी। 39वें मिनट में फ्री-किक के बाद एनजो फर्नांडीज ने बॉक्स के बाहर से शॉट लगाया, लेकिन गेंद क्रॉसबार के ऊपर निकल गई। मार्टिनेज को मिला येलो कार्ड 42वें मिनट में इंग्लैंड के अटैक के दौरान जूड बेलिंघम की जर्सी खींचने पर अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसांद्रो मार्टिनेज को मैच का पीला कार्ड दिखाया गया। दोनों टीमों की स्टार्टिंग-11 इंग्लैंड: जॉर्डन पिकफोर्ड, जॉन स्टोन्स, मार्क गुएही, रीस जेम्स, जेड स्पेंस, डेक्लन राइस, इलियट एंडरसन, जूड बेलिंघम, मॉर्गन रोजर्स, हैरी केन (कप्तान), एंथनी गॉर्डन। अर्जेंटीना: एमिलियानो मार्टिनेज, निकोलस टैगलियाफिको, लिसांड्रो मार्टिनेज, क्रिस्टियन रोमेरो, नाहुएल मोलिना, लिएंड्रो परेडेस, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडीज, लियोनेल मेसी (कप्तान), जूलियन अल्वारेज, जुलियानो सिमियोने।