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एमबीएम विवि के कुलपति को अंतरिम राहत:राज्यपाल सचिवालय को नोटिस जारी; यौन उत्पीड़न संबंधी टिप्पणी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने एमबीएम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कुमार शर्मा को अंतरिम राहत देते हुए राज्यपाल सचिवालय के 3 जुलाई 2026 के आदेश में की उस टिप्पणी के प्रभाव पर रोक लगा दी है। इसमें कहा गया था कि उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप जांच रिपोर्ट में सही पाए गए हैं। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ ने मामले में राज्यपाल सचिवालय को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। साथ ही स्थगन आवेदन पर भी नोटिस जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट रमित मेहता और तरुण दूदिया ने कोर्ट को बताया कि कुलपति ने कर्मचारी की पुनर्बहाली संबंधी आदेश को चुनौती नहीं दी है। उनकी आपत्ति केवल उन टिप्पणियों पर है, जिनमें कहा गया कि उन्होंने अध्यादेश 327 (5) का दुरुपयोग किया, उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप जांच में सही पाए गए। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय का दिया हवाला कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि जांच समिति ने केवल मानसिक प्रताड़ना के आरोपों को सही माना था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए कुलपति के विरुद्ध यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच नहीं की, क्योंकि नियोक्ता के खिलाफ ऐसी जांच उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं थी। प्रथमदृष्टया दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक टिप्पणी के संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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