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सुप्रीम कोर्ट बोला-CBSE के डिजिटल मार्किंग सिस्टम से छात्र निराश:बोर्ड से पूछा सुधार के लिए अब तक क्या किया; केंद्र से मदद मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर छात्रों की नाराजगी पर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, “देखिए, छोटे-छोटे बच्चों में कितनी निराशा है।” कोर्ट ने कहा कि सरकार से किसी टकराव की मंशा नहीं है, लेकिन व्यवस्था में कुछ समस्याएं हैं। कोर्ट ने CBSE की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है। साथ ही केंद्र से सहयोग करने की बात कही है। CBSE का OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम ऐसी व्यवस्था है, जिसमें ऑन्सर शीट की स्कैन कॉपी कंप्यूटर पर जांची जाती है। शिक्षक कागज की कॉपी देखने के बजाय डिजिटल स्क्रीन पर मूल्यांकन करते हैं। कोर्ट में सरकार के 3 तर्क… याचिका में स्पष्ट नियमावली की मांग यह जनहित याचिका राकेश बिंजोला ने वकील लक्ष्मीकांत मटादन शुक्ला के माध्यम से दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार और CBSE को निर्देश देने की मांग की गई है कि बोर्ड परीक्षाओं के लिए OSM मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ी स्पष्ट नियमावली बनाई जाए। इस व्यवस्था की निगरानी और सुधार लागू करने के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित की जाए। जिन स्टूडेंट्स को पहले ही प्रोविजनल एडमिशन मिल चुका है या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, उन्हें मिनिमम क्वॉलिफाइंग मार्क्स में राहत दी जाए। विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए निर्धारित 75 प्रतिशत या अन्य न्यूनतम कक्षा 12 अंक की शर्त से भी छूट देने का निर्देश दिया जाए। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें: सरकार ने CBSE के चेयरमैन और सचिव को हटाया: विवादित ऑन स्क्रीन मार्किंग के टेंडर की जांच के आदेश केंद्र सरकार ने मंगलवार को ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद के बीच CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया। इसके अलावा OSM सर्विस के टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। पढ़ें पूरी खबर…

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