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दतिया में BJP की हार-कांग्रेस की जीत, 5 बड़ी वजह:नरोत्तम फैक्टर नहीं चला, जातिगत समीकरण नहीं साध पाई भाजपा; बूथ मैनेजमेंट में कांग्रेस भारी

दतिया उपचुनाव का नतीजा सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं, बल्कि दोनों दलों की रणनीति और भविष्य की राजनीति का संकेत भी बन गया। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और संगठन की पूरी ताकत झोंकने के बावजूद बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी कांग्रेस के घनश्याम सिंह से 6,016 वोटों से हार गए। 2023 में भी कांग्रेस ने इसी सीट पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराया था। हार के बाद आशुतोष तिवारी ने समीक्षा की बात कही, जबकि घनश्याम सिंह ने इसे जनता का आशीर्वाद बताया। इस जीत से विधानसभा में कांग्रेस की 65 सीटें कायम रहेंगी। बीजेपी की हार के पीछे कई राजनीतिक और संगठनात्मक कारण माने जा रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट…. बीजेपी की हार के पांच प्रमुख कारण 1. टिकट बदलने का फैसला पार्टी पर भारी पड़ा
सीट खाली होने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी और समर्थकों को उनके उम्मीदवार बनने की उम्मीद थी। हालांकि अंतिम समय में बीजेपी ने टिकट बदलकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया। टिकट बदलने के विरोध में नरोत्तम समर्थकों ने करीब 18 घंटे तक ग्वालियर-झांसी हाईवे जाम रखा। डॉ. मिश्रा के समझाने पर आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन जानकारों के अनुसार कार्यकर्ताओं की नाराजगी मतदान तक बनी रही। प्रदेश नेतृत्व के मुताबिक उसने केंद्रीय नेतृत्व को डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भेजा था, जिससे टिकट बदलने का फैसला केंद्र स्तर का माना गया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि बदलाव तय था तो मिश्रा को विश्वास में लेकर अहम जिम्मेदारी दी जा सकती थी। ऐसा नहीं होने से संगठन और कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हुआ। 2. जातीय समीकरण साधने की रणनीति सफल नहीं हुई
बीजेपी ने चुनाव में जातीय समीकरणों पर विशेष जोर दिया। दतिया में करीब 40 हजार कुशवाह और 20 हजार यादव मतदाता हैं। यादव समाज तक पहुंचने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रचार किया, जबकि कुशवाह वोटरों की जिम्मेदारी सांसद भारत सिंह कुशवाह को सौंपी गई। चुनाव के दौरान कुशवाह सम्मेलन हुए और मुख्यमंत्री लव-कुश मंदिर भी पहुंचे। पार्टी को दोनों समुदायों के समर्थन की उम्मीद थी, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार टिकट बदलाव के बाद इन वर्गों का एक हिस्सा बीजेपी के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ा। नतीजे बताते हैं कि पार्टी अपेक्षित समर्थन जुटाने में सफल नहीं रही। 3. नरोत्तम समर्थकों की निष्क्रियता बूथ स्तर पर दिखी
पिछले करीब 18 वर्षों से दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा संगठन और सत्ता का प्रमुख चेहरा रहे। संगठन के कई पदों पर भी उनके समर्थकों का प्रभाव रहा। टिकट कटने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक चुनावी अभियान में सक्रिय नहीं दिखे। जानकारों के अनुसार वे पार्टी में रहते हुए भी दूरी बनाए रहे। कम समय के कारण बीजेपी गांव-गांव फैले इस नेटवर्क को दोबारा सक्रिय नहीं कर सकी। स्थिति संभालने के लिए दूसरे जिलों और आसपास की विधानसभा सीटों से कार्यकर्ताओं को बुलाया गया, लेकिन स्थानीय भौगोलिक और सामाजिक समझ की कमी दिखी। इसका उदाहरण यह रहा कि कुछ कार्यकर्ता दतिया की जगह भांडेर विधानसभा क्षेत्र के गांवों में प्रचार करने पहुंच गए। 4. विधायक और मंत्रियों की तैनाती भी बेअसर रही
बीजेपी ने चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानते हुए पूरी ताकत लगाई। 291 बूथों को 20 शक्ति केंद्रों में बांटकर प्रत्येक की जिम्मेदारी एक विधायक को दी गई। इसके अलावा आठ मंत्रियों ने भी लगातार दौरे किए। चुनाव परिणाम बताते हैं कि यह रणनीति मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सकी। न विधायक बूथ स्तर पर अपेक्षित माहौल बना पाए, न मंत्रियों की मौजूदगी चुनावी समीकरण बदल सकी। 5. 2023 की नाराजगी का असर बरकरार रहा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद मतदाताओं में बनी नाराजगी उपचुनाव तक पूरी तरह खत्म नहीं हुई। बीजेपी ने चुनाव में दतिया के विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया, लेकिन सड़क, पानी, रोजगार और व्यापार जैसे स्थानीय मुद्दों पर मतदाता सरकार के दावों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे। पार्टी ने चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया, फिर भी स्थानीय असंतोष दूर नहीं कर सकी। 2023 के मुकाबले इस उपचुनाव में मतदान करीब 9 प्रतिशत कम रहा, जिसका असर चुनाव परिणाम में भी दिखाई दिया। अब आगे क्या? दतिया उपचुनाव का असर सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव बीजेपी के संगठन, नेतृत्व और 2028 की चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकते हैं। 1. टिकट चयन और संगठन की समीक्षा होगी
हार के बाद पार्टी में टिकट चयन, बूथ प्रबंधन और स्थानीय गुटबाजी पर समीक्षा की संभावना है। यह भी सवाल उठ सकते हैं कि टिकट बदलाव के बाद पैदा हुए असंतोष को संगठन समय रहते क्यों नहीं संभाल सका। 2. विपक्ष को मिलेगा नया हमला करने का मुद्दा
बीजेपी प्रदेश की सत्ता में है और दतिया लंबे समय तक उसका मजबूत गढ़ रही है। ऐसे में सीट गंवाना कांग्रेस को सरकार और संगठन पर हमला तेज करने का अवसर देगा। विपक्ष इसे सत्ता विरोधी माहौल और बीजेपी की रणनीतिक चूक के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकता है। 3. टिकट बदलाव पर मतभेद उभर सकते हैं
हार के कारणों को लेकर पार्टी में अलग-अलग राय बन सकती है। एक पक्ष टिकट बदलाव को मुख्य वजह मानेगा, जबकि दूसरा तर्क दे सकता है कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा का स्थानीय प्रभाव पहले जैसा मजबूत था, तो नए उम्मीदवार को भी उसका लाभ मिलना चाहिए था। 4. 2028 की टिकट रणनीति बदल सकती है
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दतिया का परिणाम 2028 विधानसभा चुनाव की टिकट रणनीति को प्रभावित कर सकता है। पार्टी लंबे समय से जीत रहे नेताओं के टिकट काटने में अधिक सतर्क हो सकती है। मध्य प्रदेश में करीब 50 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मौजूदा विधायक लगातार चौथी से नौवीं बार तक जीतते रहे हैं। ऐसे में दतिया का परिणाम भविष्य के टिकट वितरण के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा सकता है। कांग्रेस की जीत के 5 प्रमुख कारण 1. परिचित चेहरे पर भरोसा रंग लाया
उपचुनाव में कांग्रेस के सामने घनश्याम सिंह, अवधेश नायक और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के परिवार के सदस्य सहित कई विकल्प थे। पार्टी के अनुसार आंतरिक सर्वे में घनश्याम सिंह सबसे मजबूत उम्मीदवार रहे। दतिया राजघराने से जुड़े होने और दो बार विधायक रहने के कारण उनकी स्थानीय पहचान व व्यक्तिगत पहुंच का लाभ कांग्रेस को मिला। 2. गुटबाजी पर भारी पड़ी एकजुटता
अंदरूनी खींचतान के लिए चर्चित कांग्रेस इस चुनाव में अपेक्षाकृत एकजुट दिखी। राज्यसभा चुनाव के दौरान मतभेद की चर्चाओं के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह ने संयुक्त रूप से प्रचार किया। दोनों नेताओं की साझा मौजूदगी से कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संदेश गया। 3. असंतोष को समय रहते संभाला
घनश्याम सिंह को टिकट मिलने के बाद अवधेश नायक और राजेंद्र भारती के समर्थकों में असंतोष की चर्चा रही। अवधेश नायक का टिकट लगातार दूसरी बार कटा, जबकि घनश्याम सिंह सेंवढ़ा से दतिया आए। स्वास्थ्य कारणों से राजेंद्र भारती प्रचार से दूर रहे और उनके कुछ समर्थकों के बीजेपी के संपर्क में होने की चर्चाएं भी रहीं। कांग्रेस नेतृत्व ने असंतोष कम करने की कोशिश की। चुनाव के दौरान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी कई बार राजेंद्र भारती के घर पहुंचे। इसका असर चुनावी अभियान में भी देखने को मिला। 4. बूथ स्तर तक पहुंचा प्रचार अभियान
कांग्रेस ने बड़े नेताओं की सभाओं के बजाय विधानसभा क्षेत्र को चार हिस्सों में बांटकर प्रचार किया। प्रत्येक हिस्से की जिम्मेदारी अलग-अलग नेताओं को सौंपी गई। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लगातार गांवों में प्रचार किया और बीजेपी पर तीखे हमले किए। उन्होंने मतदाताओं से दबाव या प्रलोभन से बचने की अपील की। बूथ स्तर तक संपर्क अभियान चलाकर कांग्रेस ने संगठन को सक्रिय बनाए रखा। 5. जातीय समीकरणों का लाभ मिला
कांग्रेस ने ब्राह्मण, कुशवाह, यादव और एससी-एसटी मतदाताओं पर विशेष ध्यान दिया। कुशवाह समाज तक पहुंच बढ़ाने के लिए सिद्धार्थ कुशवाह को चुनाव प्रभारी बनाया गया। कांग्रेस का आकलन है कि आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव की मौजूदगी से एससी वोटों के बंटवारे का अपेक्षाकृत अधिक नुकसान बीजेपी को हुआ। बदले जातीय समीकरणों का लाभ कांग्रेस को मिला। अब आगे क्या? दतिया की जीत कांग्रेस के लिए सिर्फ एक सीट का इजाफा नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में भी देखी जा रही है। 1. जीतू पटवारी का नेतृत्व मजबूत होगा
लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही कांग्रेस के लिए दतिया जैसी हाई-प्रोफाइल सीट जीतना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यह जीत जीतू पटवारी की प्रमुख चुनावी सफलताओं में शामिल होगी और संगठन में उनकी स्थिति मजबूत कर सकती है। 2. बीजेपी के गढ़ में जीत को राजनीतिक संदेश बनाएगी
कांग्रेस इस नतीजे को बीजेपी के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में अपनी जीत के उदाहरण के रूप में पेश करने की कोशिश करेगी। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ सकता है और भविष्य के चुनावों में इसी रणनीति पर भरोसा मजबूत होगा। 3. सत्ता विरोधी माहौल का मुद्दा उठाएगी
कांग्रेस इस जीत को सरकार के खिलाफ जनसमर्थन के संकेत के रूप में पेश करने की कोशिश करेगी। पार्टी यह संदेश देने का प्रयास करेगी कि बीजेपी की राजनीतिक बढ़त चुनौती दी जा सकती है, कांग्रेस मुकाबले में लौट रही है और प्रदेश में सत्ता विरोधी माहौल बन रहा है।

गाड़ी की नंबर प्लेट छिपाना धोखाधड़ी नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है, लेकिन क्रिमिनल केस नहीं माना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नंबर प्लेट छिपाना धोखाधड़ी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह मान लेना गलत है कि किसी व्यक्ति ने चालान भरने से बचने के लिए नंबर प्लेट छिपाई है। यह केवल पुलिस का अनुमान है। 28 जुलाई को एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा- मोटर व्हीकल एक्ट (MV Act) के तहत यह जुर्माना लगाने का आधार हो सकता है, लेकिन इसे आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता। धोखाधड़ी साबित करने के लिए बेईमानी की नीयत, किसी को प्रेरित करना और संपत्ति का नुकसान होना जरूरी है। क्या था पूरा मामला? याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल अहद शाकेर 5 जून 2020 को अपनी एक्टिवा चला रहे थे, जिसकी पिछली नंबर प्लेट पर काला मास्क लगा था। गश्त पर तैनात पुलिसकर्मी ने उन्हें रोका और चालान से बचने के लिए पुलिस को धोखा देने का आरोप लगाते हुए आईपीसी की धारा 420 और एमवी एक्ट की धारा 80(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की। याचिकाकर्ता ने एफआईआर रद्द करने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सामने की प्लेट को नहीं ढका गया था सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि केवल पिछली नंबर प्लेट ढकी हुई थी, जबकि सामने की प्लेट साफ दिख रही थी। कोर्ट ने कहा कि यह किसी सोची-समझी योजना के तहत पहचान छिपाने जैसा नहीं लगता। अदालत ने माना कि इस मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। सुप्रीम कोर्ट बोला- देश में लेन ड्राइविंग का सिस्टम नहीं सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। यही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्देश भी जारी किए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। पूरी खबर पढ़ें… ——————————— ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए, इन सड़कों पर भारी वाहन पार्किंग न हो
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए पूरे देश में कई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन निर्देशों एक्सप्रेसवे जैसी सड़कों पर भारी वाहनों की पार्किंग पर रोक भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक सुस्ती या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के कारण एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…

कॉकरोच जनता पार्टी दो दिन की रणनीतिक बैठक करेगी:कहा- राजनीतिक दल नहीं बनाएंगे; दीपके बोले- स्कॉलरशिप के पैसों से अमेरिका गया था

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 5 अगस्त से छत्रपति संभाजीनगर में दो दिन की रणनीति बैठक करेगी। इस बैठक में पार्टी के संस्थापक, प्रवक्ता और संगठन से जुड़े लोग शामिल होंगे। पार्टी ने कहा कि वह राजनीतिक दल नहीं बनाएगी। बैठक के बाद CJP देशभर में अपने युवाओं की जरूरतों को समझने के लिए लिसनिंग टूर करेगी। पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिली थी और बाकी पैसों के लिए लोन लिया था, जो अभी चुकाना बाकी है। इससे पहले, सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने उनके पिता की संपत्ति और फंड की जांच की मांग की थी। और सवाल उठाए थे कि दीपके के पास अमेरिका जाकर पढ़ाई करने के पैसे कहां से आए। दीपके बोले- जंतर-मंतर पर घुसपैठिए घुसे अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण छात्र विरोध प्रदर्शन में बाहरी लोगों ने घुसपैठ की थी, जिसके कारण 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हिंसा हुई। उन्होंने दावा किया कि विरोध को बदनाम करने के लिए बाहर से लोग भेजे गए थे। इन लोगों की दिल्ली पुलिस के साथ मिलीभगत थी। दिल्ली पुलिस पर उठाए सवाल दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी और पुलिस कार्रवाई कैसे हो सकती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिस केवल 12 साल की लड़कियों पर लाठी चलाने के लिए सक्रिय होती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस का यह कहना कि विरोध स्थल पर 2100 अपराधी देखे गए थे, यह अमित शाह और पुलिस की विफलता है। उन्होंने इसे पुलिस की सोची-समझी साजिश करार दिया। कॉकरोच पार्टी ने स्टूडेंट्स की लीगल मदद के लिए फंड बनाया कॉकरोच जनता पार्टी ने 27 जुलाई को पेपर लीक आंदोलन के बाद आपराधिक मामलों का सामना कर रहे छात्रों की कानूनी सहायता के लिए लीगल डिफेंस फंड बनाने की घोषणा की थी। सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने इस फंड में 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था। उन्होंने देशभर के वकीलों से भी इस कोष में योगदान देने की अपील की थी। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा था कि केंद्र सरकार के आश्वासन के बावजूद देशभर में छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की आशंका है। उन्होंने यह भी बताया था कि इस मामले में CJP सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के संपर्क में है। उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल सिब्बल भी मौजूद थे। पूरी खबर पढ़ें… महाराष्ट्र के अभिजीत AAP के साथ काम कर चुके 30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। ———————— ये खबर भी पढे़ं… अभिजीत दीपके बोले- CJP की अगली रणनीति जल्द बताएंगे:कल ही आंदोलन खत्म हुआ, थोड़ा समय दें; प्रदर्शनकारियों से केस हटाने पर बातचीत जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- “आगे की रणनीति का ऐलान जल्द करेंगे। पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कल ही खत्म हुआ है। प्लीज हमें थोड़ा समय दें।” न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक जब उनसे पूछा गया कि पंजाब में पेपर लीक को लेकर उनकी रणनीति क्या होगी, इस पर दीपके ने जवाब दिया कि उस पर भी बात करेंगे। हम अभी इसके लिए प्लानिंग कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…

कर्नाटक में मंत्रिमंडल का विस्तार, 19 मंत्रियों ने शपथ ली:किसी महिला को मंत्री नहीं बनाया, तीन पूर्व CM के बेटे अब मंत्री

कर्नाटक में CM डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली दो महीने पुरानी कैबिनेट का पहला विस्तार सोमवार को हुआ। 19 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। नए मंत्रियों में से छह, सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली पिछली सरकार का हिस्सा थे। तीन पूर्व CM के बच्चे भी अब मंत्री हैं। ये हैं यतींद्र सिद्धारमैया (जो पहले से ही मंत्री हैं), कुमार बंगारप्पा (एस बंगारप्पा के बेटे) और अजय सिंह (एन धर्म सिंह के बेटे)। गायत्री का नाम था लेकिन शपथ नहीं ली राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगदागी, रुद्रप्पा लमानी, के एस बसवंतप्पा, बी नागेंद्र, टी रघुमूर्ति, बी जेड जमीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड ,मधु बंगारप्पा,पुत्तुरंगाशेट्टी और एस एस मल्लिकार्जुन,अजय सिंह, एन चालुवरया स्वामी, के एम शिवलिंगे गौड़ा, एचसी बालकृष्ण , बसवराज रायरेड्डी , विजयानंद कशप्पनवर और लक्ष्मण सावदी को शपथ दिलाई।
गायत्री शांतेगौड़ा का नाम कांग्रेस हाई कमान की मंजूर की गई अंतिम सूची में था लेकिन उन्होंने शपथ नहीं ली, जिससे कर्नाटक मंत्रिमंडल में कोई महिला मंत्री नहीं रह गई। 3 जून को CM शिवकुमार और 13 मंत्रियों ने शपथ ली थी डीके शिवकुमार ने 3 जून को उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर और 12 अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। कर्नाटक में संवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री सहित कुल 34 मंत्री हो सकते हैं। उधर, कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में शामिल न किए जाने से नाराज, कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौडा वी. पाटिल ने सोमवार को अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। कर्नाटक में वोक्कालिगा, लिंगायत और कुरबा समाज अहम कर्नाटक में लिंगायत (लगभग 17%) सबसे बड़ा समुदाय है, जबकि दक्षिण कर्नाटक में वोक्कालिगा (लगभग 15%) का दबदबा है, जिसका नेतृत्व डी के शिवकुमार करते हैं। वहीं, कुरबा (लगभग 7-8%) समाज एक प्रमुख पिछड़ा वर्ग है, जिससें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आते हैं। वे अपनी अहिंदा राजनीति के जरिए मजबूत पकड़ रखते हैं। सिद्धारमैया के बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है।

जालंधर के पेट्रोल पंप पर हंगामा:कार मालिक बोला- ₹300 का डीजल भराया, गाड़ी की सुई हिली तक नहीं; लेडी मैनेजर के केबिन में घुसी भीड़

जालंधर में इंडियन ऑयल के एक पेट्रोल पंप पर डीजल भरवाने को लेकर हंगामा हो गया। कार मालिक ने आरोप लगाया कि 300 रुपए का डीजल भरवाने के बावजूद उसकी गाड़ी के फ्यूल मीटर और डीटीई (डिस्टेंस टू एम्प्टी) में कोई बदलाव नहीं आया। मालिक का आरोप है कि विरोध करने पर पंप कर्मचारियों ने अभद्र व्यवहार किया और महिला मैनेजर बाहर तक नहीं आईं। बाद में मालिक ने अपने पार्षद प्रतिनिधि भाई को मौके पर बुला लिया, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। इस दौरान अन्य ग्राहकों ने भी पेट्रोल पंप पर तेल कम डालने और मीटर को जीरो किए बिना फ्यूल भरने जैसे आरोप लगाए। मामला इतना बढ़ा कि महिलाओं ने मैनेजर के केबिन में पहुंचकर माफी मांगने की मांग की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब सिलसिलेवार जानिए पूरा मामला… 300 रुपए का डीजल भरवाया, मीटर में बदलाव नहीं दिखा:
कार मालिक अनुज ने बताया कि उसने 120 फुटी रोड स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर रविवार शाम को 300 रुपए का डीजल भरवाया, लेकिन गाड़ी स्टार्ट करने के बाद भी फ्यूल सुई और डीटीई मीटर में कोई बदलाव नहीं दिखा। विरोध करने पर पंप कर्मचारियों से बहस हो गई। दोबारा डीजल डाला, फिर भी नहीं बढ़ा फ्यूल लेवल
अनुज ने कहा कि गाड़ी कुछ दूरी पर झटके खाने लगी। वापस पंप पहुंचने पर कर्मचारियों ने गलती मानते हुए दोबारा डीजल डाला। लेकिन इसके बाद भी मीटर में कोई बदलाव नहीं दिखाई दिया। अन्य ग्राहकों ने भी लगाए गड़बड़ी के आरोप
मौके पर मौजूद कई ग्राहकों ने दावा किया कि इस पेट्रोल पंप पर पहले भी ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका आरोप था कि कई बार मीटर को जीरो किए बिना ही ईंधन भर दिया जाता है। पार्षद प्रतिनिधि पहुंचे, बढ़ा विवाद
मामला बढ़ने पर अनुज ने अपने भाई और क्षेत्र के पार्षद प्रतिनिधि डॉ. मनीष को बुलाया। आरोप है कि उनके साथ भी महिला मैनेजर ने अभद्र व्यवहार किया, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। महिलाओं ने कैबिन में पहुंचकर माफी की मांग की
अनुज के परिजन और महिलाएं भी मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने महिला मैनेजर के केबिन में जाकर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप कर मैनेजर को दूसरे केबिन में पहुंचाया। पुलिस ने जांच शुरू की
डिवीजन नंबर-5 थाना पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस कार से डीजल निकालकर उसकी वास्तविक मात्रा की जांच कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मोदी को गालियां देने वाली लड़की पर FIR नहीं होगी:वकील बोलीं- केस वापस; दिल्ली पुलिस ने कहा- PM ने माफ कर दिया, कार्रवाई नहीं होगी

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियां देने वाली नाबालिग लड़की के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। नोएडा में FIR लिखाने वाली वकील स्मृति सिंह चंदेल ने दैनिक भास्कर से कहा- केस वापस हो गया है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने लड़की पर एक्शन नहीं लेने का फैसला किया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जब पीएम मोदी ने ही उसे माफ कर दिया, उसके बाद उस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। दरअसल, नोएडा पुलिस ने प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक टिप्पणी करने वाली लड़की के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की थी। इसके तुरंत बाद यानी 1 अगस्त की रात लड़की का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उसने माफी मांगते हुए कहा था कि वह बहकावे में आ गई थी। यह घटनाक्रम कैसे हुआ… 4 स्टेप में समझें… 23 जुलाई: संसद मार्च में प्रदर्शन करने पहुंचे जेन Z, लड़की का वीडियो वायरल हुआ 23 जुलाई को सेक्टर 168 की रहने वाली एक लड़की का वीडियो सामने आया जिसमें वह प्रधानमंत्री मोदी को गालियां देते हुए दिखाई दे रही थी। इसके बाद वह हंसती हुई वहां से निकल जाती है। 30 जुलाई: स्मृति सिंह ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर FIR के बारे में बताया गाली देने वाली नोएडा की लड़की के खिलाफ जीरो FIR दर्ज हो गई है। यह कार्रवाई नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में गाजियाबाद की वकील स्मृति सिंह चंदेल की शिकायत पर हुई। 31 जुलाई: पीएम मोदी ने एक रील पोस्ट की, कहा- बच्चों को माफ करना चाहता हूं PM मोदी ने रात 11 बजे इंस्टाग्राम पर रील शेयर की। उन्होंने कहा बचपन में गलतियां होती हैं। बचपन की गलतियों को सुधारने का अवसर भी होता है। ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, इन्हें माफ करना चाहता हूं। 1 अगस्त: देर रात वीडियो जारी कर माफी मांगी, बोली- पहली और आखिरी गलती लड़की ने माफी मांगने का वीडियो जारी किया। उसने कहा, ‘मैं सिर्फ 15 साल की हूं, यह मेरी पहली और आखिरी गलती थी। मैं बहकावे में आ गई थी।’ लड़की हाथ जोड़कर अपने बयान पर माफी मांगती नजर आ रही है। ***************** यह खबर भी पढ़िए:- जंतर-मंतर प्रदर्शन; सरकार ने कहा- स्टूडेंट्स पर केस नहीं होगा:2700 अपराधियों पर FIR कायम रहेगी; सुप्रीम कोर्ट बोला-सख्ती करने वाले जवानों को न बचाएं केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि NEET पेपर लीक को लेकर विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को कहा, ‘सरकार अपने वादे पर कायम है। छात्रों के खिलाफ कोई FIR नहीं होगी।’ मेहता ने ये भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान गंभीर अपराधों को लेकर जिन 2700 से ज्यादा लोगों पर FIR दर्ज हुई हैं, इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस मसले पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी 3 मांगें थी, जो सरकार ने मान ली थीं। इनमें एक मांग यह भी थी कि सरकार विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। मामले पर अब 18 अगस्त को सुनवाई होगी। पढ़ें पूरी खबर…

सावन सोमवार पर उत्तराखंड शिवमय:हरिद्वार पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या 1 करोड़ के पार, केदारनाथ समेत प्रमुख शिवालयों में लंबी कतारें

सावन के सोमवार पर पूरा उत्तराखंड शिवभक्ति में डूबा नजर आया। सोमवार तड़के से केदारनाथ, टपकेश्वर, नीलकंठ, दक्षेश्वर, जागेश्वर समेत प्रदेश के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। दूसरी ओर कांवड़ यात्रा भी अपने चरम पर पहुंच गई है। हरिद्वार पुलिस के मुताबिक यात्रा शुरू होने के बाद से सोमवार तक करीब 1 करोड़ 9 लाख से अधिक कांवड़िए हरिद्वार पहुंच चुके हैं। वहीं, कांवड़ मेले के पांचवें दिन 32.25 लाख शिवभक्त पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। केदारनाथ धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। टपकेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए करीब 500 मीटर से एक किलोमीटर तक लंबी कतार लगी। हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु सुबह तीन बजे से जलाभिषेक के लिए लाइन में लग गए थे। ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव, उत्तरकाशी के काशी विश्वनाथ, अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम, बागेश्वर के बागनाथ मंदिर, रुद्रप्रयाग के तुंगनाथ और काशीपुर के मोटेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिरों में विशेष रुद्राभिषेक, महाआरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर पूजा-अर्चना की। पर्वतीय जिलों में तीसरा, तराई में पहला सावन सोमवार उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में सोमवार को सावन का तीसरा सोमवार मनाया जा रहा है, जबकि तराई क्षेत्र में पहला सोमवार है। इसकी वजह प्रदेश में प्रचलित दो पंचांग परंपराएं हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पूर्णिमांत और तराई में अमांत पंचांग के अनुसार सावन की गणना होती है। हालांकि दोनों क्षेत्रों में शिवभक्ति का उत्साह समान रहा। कांवड़ यात्रा अपने चरम पर हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के चौथे दिन भारी भीड़ रही। मेला कंट्रोल रूम के अनुसार रविवार को 31.50 लाख श्रद्धालु गंगाजल लेकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक करीब 80 लाख श्रद्धालु गंगाजल लेकर विभिन्न राज्यों के लिए निकल चुके हैं। वहीं हरिद्वार के एसपी सिटी अभय सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया कि यात्रा के दौरान हरिद्वार पहुंचने वाले कांवड़ियों की संख्या 1 करोड़ तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। हरकी पैड़ी से कांवड़ मार्ग तक ‘बोल बम’ के जयघोष सोमवार सुबह हरकी पैड़ी, गंगा घाटों और कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा माहौल शिवमय बना रहा। शहरभर में सेवा शिविर, भंडारे और चिकित्सा शिविरों के जरिए श्रद्धालुओं की सेवा की जा रही है। तस्वीरें देखिए- प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से जलाभिषेक सावन के सोमवार पर हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव, बिल्केश्वर महादेव और कोटीश्वर महादेव, ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव, देहरादून के टपकेश्वर महादेव, उत्तरकाशी के काशी विश्वनाथ मंदिर, रुद्रप्रयाग के तुंगनाथ, अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम, बागेश्वर के बागनाथ मंदिर और केदारनाथ धाम में तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मंदिरों में विशेष रुद्राभिषेक, महाआरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। हरिद्वार और ऋषिकेश में बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगाजल भरने के बाद सीधे नीलकंठ महादेव समेत विभिन्न शिवालयों की ओर रवाना हुए। वहीं चारधाम यात्रा के बीच केदारनाथ धाम में भी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी रही। हरिद्वार पूरी तरह शिवमय, कांवड़ मार्गों पर भगवा सैलाब धर्मनगरी हरिद्वार इन दिनों पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंगी हुई है। हर की पैड़ी से लेकर प्रमुख गंगा घाटों और राष्ट्रीय राजमार्गों तक भगवा वस्त्रधारी कांवड़ियों का सैलाब दिखाई दे रहा है। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। शहरभर में सेवा शिविरों, भंडारों और चिकित्सा शिविरों के माध्यम से श्रद्धालुओं की सेवा की जा रही है।
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जोधपुर में 5 घंटे में 63 हजार मिर्ची बड़े खाए:31 किलो का मिर्ची बड़ा बनाया; 40 लोगों ने पूरा किया चैलेंज

जोधपुर में सावन के पहले सोमवार पर ‘मिर्ची बड़ा महोत्सव’ हुआ। दैनिक भास्कर के जोधपुर संस्करण के 30वें साल में प्रवेश के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने 5 घंटे में 63 हजार मिर्ची बड़े खाए। महोत्सव में नया रिकॉर्ड बना। अशोक उद्यान की हरियाली के बीच चटपटे मिर्ची बड़े लोगों को खूब भाए। महोत्सव का मुख्य आकर्षण 31 किलो का विशाल मिर्ची बड़ा था। यह जोधपुर में बना अब तक का सबसे बड़ा मिर्ची बड़ा है। इसे बनाने में 3 घंटे लगे। यही नहीं, सोमवार का व्रत रखने वाले लोगों के लिए स्पेशल सहगार (व्रत) नमकीन और फलाहारी मिर्ची बड़े भी थे। लाइव बैंड के बीच लोगों ने मिर्ची बड़े का स्वाद लिया। बहुत से लोग परिवार के साथ आए। महोत्सव में मिर्ची बड़ा चैलेंज भी था। इसमें 30 सेकेंड में मिर्ची बड़ा खत्म करने पर गिफ्ट दिया गया। 40 लोगों ने इस चैलेंज को पूरा किया। एक युवक ने सबसे कम महज 12 सेकेंड में मिर्ची बड़ा खाया। मिर्ची बड़ा महोत्सव 10 अगस्त तक चलने वाले ‘भास्कर मारवाड़ रो’ उत्सव का पार्ट है। देखिए, मिर्ची बड़ा महोत्सव की PHOTOS… … मिर्ची बड़ा महोत्सव के पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग पढ़िए…

NEET PG-एक ही शिफ्ट में पेपर, घर के पास सेंटर:पेपर लीक से सबक- पेपर-NTA के दफ्तर की चौबीस घंटे सुरक्षा; 7.5 करोड़ का टेंडर जारी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने NEET PG 2026 परीक्षा के लिए कई बड़े सुधारों की घोषणा की है। इसमें परीक्षार्थियों की यात्रा और परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। इस बार परीक्षा 30 अगस्त को होनी है। इसके लिए 2.73 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 12.5% ज्यादा है। परीक्षा देशभर के 340 शहरों के लगभग 1300 सेंटर्स पर होगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से सबक लेते हुए परीक्षा के पूरे इकोसिस्टम की सुरक्षा पुख्ता करना शुरू कर दिया है। इसके लिए 7.5 करोड़ का टेंडर जारी किया है। इसमें एनटीए मुख्यालय समेत संवेदनशील जगहों पर 24 घंटे सिक्योरिटी दी जाएगी। यह टेंडर 25 जुलाई को जारी हुआ है। 17 अगस्त को बोलियां खोली जाएंगी। जो भी एजेंसी नियुक्त होगी, उसे दो साल काम मिलेगा। ये बदलाव: फिंगर प्रिंट नहीं मिले तो आंखें स्कैन कर देंगे एंट्री

नितिन नवीन की सीट पर प्रशांत किशोर जीते:भाजपा कैंडिडेट को 19324 वोट से हराया; MP के दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा जीती

बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के रिजल्ट आ गए हैं। एमपी के दतिया में कांग्रेस और गुजरात में भाजपा जीत गई है। बिहार के बांकीपुर में नितिन नवीन की सीट पर प्रशांत किशोर जीत गए हैं। जन सुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर 19,324 वोटों से जीते हैं। प्रशांत को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट है। वे यहां से लगातार 5 बार विधायक रहे हैं। उनके राज्यसभा जाने के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। काउंटिंग के दौरान चुनाव आयोग की वेबसाइट पर कुछ गड़बड़ देखने को मिली। सुबह से वेबसाइट पर 31 राउंड की काउंटिंग बताई जा रही थी। 31 राउंड पूरे होते ही पहले 32 और फिर 36 राउंड काउंटिंग दिखाई जाने लगी। बाद में फिर 32 राउंड की काउंटिंग दिखा दी गई। इधर, MP के दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने 6,016 वोटों से जीत दर्ज की। भाजपा ने यहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। आशुतोष नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर भी नहीं जीत पाए। गुजरात के मांजलपुर में भाजपा के सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने 30630 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को हराया। तीनों सीटों पर 30 जुलाई को वोटिंग हुई थी। बांकीपुरः PK को भाजपा-राजद के कुल वोटों से भी ज्यादा वोट जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में 64,151 वोट (49.23%) हासिल कर जीत दर्ज की। भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 वोट (34.40%) मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 19,324 वोट रहा। राजद की रेखा कुमारी 14,273 वोट (10.95%) के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। भाजपा और राजद को मिलाकर 59,100 वोट मिले, जो अकेले प्रशांत किशोर के वोटों से 5,051 कम हैं। यह उनकी मजबूत बढ़त को दिखाता है। चुनाव में कुल 1,30,313 वोट पड़े। इनमें से लगभग हर दूसरा वोट प्रशांत किशोर के पक्ष में गया। NOTA को 646 वोट (0.50%) मिले। वहीं, शीर्ष तीन उम्मीदवारों के बाद कोई भी प्रत्याशी 1,000 वोट तक नहीं पहुंच सका। चौथे स्थान पर रहे मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव को 973 वोट (0.75%) मिले। दतिया में ASP ने कांग्रेस के वोट काटे, लेकिन फिर भी जीत

कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने दतिया उपचुनाव में 66,757 वोट (42.39%) हासिल कर जीत दर्ज की। भाजपा के आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट (38.57%) मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 6,016 वोट रहा। तीसरे स्थान पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दामोदर यादव ‘मंडल’ रहे। उन्हें 22,527 वोट (14.30%) मिले। कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन आजाद समाज पार्टी ने भी अच्छी-खासी हिस्सेदारी लेकर चुनाव को त्रिकोणीय बनाया। चुनाव में कुल 1,57,499 वोट पड़े। इनमें कांग्रेस और भाजपा को मिलाकर 1,27,498 वोट, यानी करीब 81% वोट मिले। वहीं तीसरे स्थान पर रहे दामोदर यादव को अकेले 14.30% वोट मिले।
बांकीपुर चुनाव भास्कर कार्टूनिस्ट मंसूर नकवी की नजर से… उपचुनाव नतीजों से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…