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कर्नाटक में जल्द हो सकता है कैबिनेट विस्तार:डीके शिवकुमार और कांग्रेस आलाकमान की दिल्ली में बैठक; 20 नए मंत्री शामिल हो सकते हैं

कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के शपथ लेने के करीब दो महीने बाद भी मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है। शिवकुमार और राज्य के कई कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आलाकमान से मुलाकात की। यहां कैबिनेट विस्तार पर चर्चा हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 नए मंत्रियों के नाम आज तय हो सकते हैं। वहीं, अगले सप्ताह शपथ ग्रहण हो सकता है। अभी कैबिनेट में सीएम समेत 14 मंत्री हैं। कर्नाटक की कैबिनेट में 34 मंत्री शामिल हो सकते हैं डीके शिवकुमार ने 3 जून को उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर और 12 अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। कर्नाटक में संवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री सहित कुल 34 मंत्री हो सकते हैं, जिसके चलते अभी भी लगभग 20 पद खाली हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमांड जातीय, सामुदायिक और नए-पुराने नेताओं में बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है जिसकी वजह से कैबिनेट विस्तार में देरी हो रही है। इसके अलावा, डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के गुटों की ओर से अलग-अलग नाम सुझाए जा रहे हैं। कर्नाटक की राजनीति में वोक्कालिगा, लिंगायत और कुरबा समाज अहम कर्नाटक में लिंगायत (लगभग 17%) सबसे बड़ा समुदाय है, जबकि दक्षिण कर्नाटक में वोक्कालिगा (लगभग 15%) का दबदबा है, जिसका नेतृत्व उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार करते हैं। वहीं, कुरबा (लगभग 7-8%) समाज एक प्रमुख पिछड़ा वर्ग है, जिससे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आते हैं और वे अपनी अहिंदा राजनीति के जरिए मजबूत पकड़ रखते हैं। सिद्धारमैया के बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है। —————————— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:सबसे अमीर सीएम डीके शिवकुमार की कहानी; जमीन बेचकर चुनाव लड़ा, ED ने पकड़ा तो रो पड़े, जेल में मिलने पहुंचीं सोनिया गांधी बात अक्टूबर 1999 की है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 224 में 132 सीटें जीतीं। एसएम कृष्णा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले थे। कृष्णा के करीबी थे 37 साल के डीके शिवकुमार। इतने करीबी कि नए मंत्रिमंडल की लिस्ट भी दोनों ने साथ मिलकर तैयार की। लेकिन एक रात पहले कांग्रेस हाईकमान से मिली फाइनल लिस्ट में डीके का ही नाम नहीं था। पूरी खबर पढ़ें…

हर्षानंद गिरि बोलीं- मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया:संतों पर सवाल नहीं उठाए, आश्रम की जिम्मेदारी संभालने को भी तैयार हूं

साध्वी हर्षानंद गिरि ने आश्रम में न रहने संबंधी बयान से यू-टर्न ले लिया है। अब उन्होंने कहा है- मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। मेरा उद्देश्य किसी आश्रम या संत समाज पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाना था। भोपाल में रहने वाली साध्वी हर्षानंद गिरि ने ये बयान रविवार को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दिया है। किचन में खाना बनाते हुए रिकॉर्ड किए गए वीडियो की शुरुआत “जय श्रीराम” से करते हुए हर्षानंद गिरि ने कहा कि वे आश्रम में रहना पसंद करती हैं, क्योंकि वहां उनका समय धर्म-कर्म, अध्ययन और पूजा-पाठ में बीतता है। घर पर रहने पर उन्हें घरेलू काम भी करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा- यदि कोई संत, संस्था या आश्रम सुरक्षा की गारंटी ले और यह भरोसा दे कि वहां कोई नुकसान नहीं होगा, तो मैं आज भी आश्रम में रहकर सेवा करने के लिए तैयार हूं। यदि किसी आश्रम की जिम्मेदारी सौंपी जाए तो मैं उसे संभालने के लिए भी तैयार हूं। घर पर खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करती हूं वीडियो में हर्षानंद गिरि ने उज्जैन में एक महामंडलेश्वर पर दर्ज रेप के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि आरोपी अब भी फरार है। ऐसी घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और इसी कारण वे अपने घर पर खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं। महिलाओं के लिए आश्रम बनाने की इच्छा जताई हर्षानंद गिरि ने कहा कि भविष्य में वे ऐसा आश्रम बनाना चाहती हैं, जहां घरेलू हिंसा, सामाजिक प्रताड़ना या अन्य कारणों से बेघर हुई महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। उन्होंने कहा कि समाज में कई ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। वीडियो के अंत में उन्होंने “हर-हर महादेव” से अपनी बात खत्म की। पहले कहा था- संत से ज्यादा मेरी सास बन गए मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ साध्वी हर्षानंद गिरि ने इससे पहले 31 जुलाई को कहा था- ये कौन से संत हैं, जिन्हें मेरी हर बात बुरी लग जाती है? मैं खाऊं-पहनूं, कहीं रहूं-किसी से मिलूं। कहीं घूमूं तो इन्हें बुरा लग जाता है। ये कौन हैं, जो संत से ज्यादा मेरी सास बन गए हैं, जो हर बात पर मुंह फुला लेते हैं। उन्होंने कहा था- जिस समाज में 2 महीने की बेटी सुरक्षित नहीं है। हर जगह से रेप, कितने-कितने अपराध होने की सूचना मिलती है, वहां पर मैं कहां रहूं? मुझे बताओ। मैं कहां सुरक्षित हूं? जो संत बोल रहे हैं कि मुझे परिवार के साथ नहीं रहना, वो संत मेरी सुरक्षा की 100% गारंटी ले लें। मैं उनके आश्रम चली जाऊंगी। संतों को कब से छोटी-छोटी बातों का बुरा लगने लगा, मुझे यह नहीं समझ में आता है। उनका गुस्सा पानी के बुलबुलों के समान होता है। संत में तो राग, द्वेष, ईर्ष्या कुछ नहीं होता। संतों में सिर्फ प्यार होता है। वे बड़ी से बड़ी बातों को हवा में उड़ा देते हैं। खबर पर आप अपनी राय यहां दे सकते हैं… मामले से जुड़ा ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… आश्रमों में केरल से मसाज करने वाले आते हैं, हर्षा को दीक्षा देने वाले गुरु का खुलासा मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि फिर विवादों में हैं। उन्होंने कुछ संतों पर निशाना साधा। आरोप लगाया कि वे उनके खाने-पहनने और माता-पिता के साथ रहने को लेकर लगातार टीका-टिप्पणी करते हैं। तो क्या संन्यास को लेकर कोई लिखित नियम हैं, हर्षा ने क्यों कहा कि बड़े-बड़े संत मेनिक्योर-पेडिक्योर करवाते हैं? पूरा विवाद क्या है, पढ़ें पूरी खबर…

गोवा में कांग्रेस-GFP में गठबंधन पर चर्चा:AAP ने साथ आने के संकेत दिए; अगले साल चुनाव, BJP का लगातार चौथी बार सरकार बनाने का लक्ष्य

गोवा में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) ने गठबंधन को लेकर शुरुआती बातचीत शुरू कर दी है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी गठबंधन के संकेत दिए हैं। गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गिरीश चोडंकर ने बताया कि उन्होंने GFP प्रमुख विजय सरदेसाई के साथ गठबंधन को लेकर चर्चा की है। दोनों नेताओं की शनिवार को दक्षिण गोवा के फतोरदा शहर में मुलाकात हुई थी। कांग्रेस और GFP ने 2022 का विधानसभा चुनाव भी साथ मिलकर लड़ा था। चोडंकर ने कहा कि शनिवार को हुई बातचीत शुरुआती दौर की थी। गठबंधन को आगे बढ़ाने पर अभी फैसला लिया जाना बाकी है। उन्होंने बताया कि सीट शेयरिंग समेत अन्य मुद्दों को अंतिम रूप देने के लिए वे जल्द ही फिर से मुलाकात करेंगे। AAP ने कहा- समान विचारधारा वाले दलों से गठबंधन के लिए तैयार वहीं आम आदमी पार्टी गोवा के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक ने शनिवार को अपनी पार्टी की उस कमेटी के साथ बैठक की, जिसे समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन पर फैसला लेने की जिम्मेदारी दी गई है। नाइक ने पत्रकारों से कहा कि AAP समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य बीजेपी सरकार को हराना है। AAP ने 2022 में 40 सीटों में 39 पर अपने उम्मीदवार उतारे और अलग चुनाव लड़ा। AAP ने 2 सीटें (बेनेउलिम और वेलिम) जीतीं और पहली बार गोवा विधानसभा में पहुंची। चुनाव के बाद AAP के दोनों विधायक पार्टी में बने रहे। लगातार 3 बार से सत्ता में बीजेपी, अभी 33 विधायक गोवा की 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने की संभावना है। अभी बीजेपी 33 विधायकों के समर्थन से सत्ता में है। इनमें से 28 विधायक बीजेपी के हैं, तीन निर्दलीय हैं और दो विधायक महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (MGP) के हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 40 में से 20 सीटें जीती थीं। बाद में कांग्रेस के 8 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे पार्टी का बहुमत और मजबूत हो गया। अब बीजेपी ने 2027 के चुनाव में 30 से ज्यादा सीटें जीतकर लगातार चौथी बार सरकार बनाने का लक्ष्य तय किया है। ये खबर भी पढ़ें… गेस्ट हाउस में बदलेगा पूर्व CM केजरीवाल का बंगला: दिल्ली सरकार जल्द मंजूरी देगी, मंत्री-अधिकारी ठहरेंगे; भाजपा ने शीश महल नाम दिया था दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास रहे सिविल लाइंस स्थित फ्लैगस्टाफ रोड के बंगले को राज्य सरकार स्टेट गेस्ट हाउस में बदलने की तैयारी कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर सरकार अंतिम फैसला लेने के करीब है। बंगला नंबर-6 को अन्य राज्य अतिथि गृहों की तरह विकसित किया जाएगा। यहां बाहर से आने वाले मंत्री और सरकारी अधिकारी ठहरेंगे। इसके लिए शुल्क भी लिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

पीएम बोले- भारत में ड्रग्स सप्लाई आतंकी साजिश का हिस्सा:दुश्मन देश युवाओं को नशे में धकेलना चाहते हैं; हमें उनकी प्लानिंग नाकाम करनी है

पीएम मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि भारत में ड्रग्स की सप्लाई दुश्मन देशों की आतंकी साजिश का हिस्सा है। पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संबोधन में कहा- दुश्मन देश भारतीय युवाओं को नशे के जाल में धकेलना चाहते हैं। इस साजिश को मिलकर नाकाम करना होगा। विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होने के साथ नशे से भी दूर रहेगा। उन्होंने बताया कि अगले 100 सप्ताह तक हर रविवार कला, संस्कृति, खेल और अन्य गतिविधियों के जरिए नशा मुक्ति का संदेश देशभर में पहुंचाया जाएगा। पीएम ने युवाओं से इस अभियान का नेतृत्व करने और 2047 तक विकसित भारत बनाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। पीएम की स्पीच की 5 बड़ी बातें… 1. नशा सपनों और परिवार दोनों को तोड़ देता है PM मोदी ने कहा कि नशा युवाओं का फोकस भटकाकर उन्हें धीरे-धीरे उनके सपनों से दूर ले जाता है। आज भारत के युवा स्टार्टअप, AI और स्पेस जैसे क्षेत्रों में दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन अगर कोई युवा ड्रग्स की गिरफ्त में आ जाए तो सिर्फ उसका सपना ही नहीं, पूरा परिवार हार जाता है। नशा एक पिता के सपनों और बहन की उम्मीदों को भी तोड़ देता है। 2. दुश्मन देश ड्रग्स के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे नशा केवल व्यक्ति को नहीं, बल्कि राष्ट्र की ताकत को भी कमजोर करता है। दुश्मन देश भारतीय युवाओं को ड्रग्स के जाल में फंसाने की साजिश रचते हैं। सरकार नशे के कारोबारियों और तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। 3. ड्रग्स थोड़ी देर का हाई, लेकिन जिंदगीभर का नुकसान ड्रग्स कुछ समय के लिए हाई देता है, लेकिन करियर और फैमिली लाइफ को बर्बाद कर देता है। हमारे संतों और गुरुओं ने भी नशे से दूर रहने की सीख दी है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो नशा इंसान की बुद्धि और विवेक छीन ले, वह उसे पतन की ओर ले जाता है। 4. नशे से बाहर निकले युवाओं को दूसरा मौका मिलना चाहिए नशे की लत से लड़कर बाहर निकलने वाले असली योद्धा हैं। किसी व्यक्ति का अतीत उसकी पहचान नहीं होता, बल्कि मुश्किलों से बाहर निकलने का उसका साहस उसकी असली पहचान होता है। 5. ड्रग्स माफिया पर कार्रवाई कई गुना बढ़ी देश में नशे के कारोबारियों और तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त की जा रही है और कार्रवाई पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। नशा मुक्त युवा कार्यक्रम में 1 करोड़ से ज्यादा युवा शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ सुबह 11 बजे से शुरू हुआ। प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले देशभर के युवाओं ने एक साथ ‘नशा मुक्त भारत’ की शपथ ली। यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर के 28 हजार से ज्यादा स्थानों पर एक साथ आयोजित किया गया। अभियान में 1 करोड़ से ज्यादा युवा शामिल हुए। कार्यक्रम में 5 प्रमुख आध्यात्मिक गुरु—अम्मा, श्री श्री रविशंकर, दाजी, डॉ. चिन्मय पंड्या और स्वामी ब्रह्मविहारीजी भी वर्चुअली जुड़े। इसके अलावा कई मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। 100 हफ्तों तक हर रविवार कार्यक्रम होगा इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना और उन्हें अपने समाज में बदलाव लाने के लिए आगे बढ़ाना है। यह अभियान अगले 100 हफ्तों तक चलेगा। इसके तहत हर रविवार देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे, जिनके जरिए लोगों को नशे के नुकसान बताए जाएंगे और नशा मुक्त भारत का संदेश दिया जाएगा। नशे के खिलाफ जन आंदोलन बनाने की कोशिश यह अभियान 125 से ज्यादा आध्यात्मिक संगठनों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, सामाजिक संस्थाएं और उद्योग संगठन भी इस अभियान से जुड़े हैं। सरकार चाहती है कि इस अभियान में स्कूल, कॉलेज, युवा संगठन, सामाजिक संस्थाएं, उद्योग संगठन और आध्यात्मिक संस्थाएं मिलकर काम करें। उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुहिम से जुड़ें और नशे के खिलाफ इसे जन आंदोलन बनाया जाए। भास्कर नॉलेज | नशे का आतंकवाद से कनेक्शन सवालः नार्को-टेररिज्म क्या है? जवाबः जब ड्रग्स बेचकर कमाए गए पैसे का इस्तेमाल आतंक फैलाने, हथियार खरीदने और आतंकी गतिविधियां चलाने में होता है, तो इसे नार्को-टेररिज्म कहा जाता है। सवालः नशा फैलाने में पाकिस्तान का नाम क्यों आता है? जवाबः पंजाब और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान सीमा से हेरोइन और दूसरे नशे की तस्करी बड़ी चुनौती है। ड्रोन और सीमा पार नेटवर्क के जरिए नशा भेजा जाता है। हालांकि, भारत में आने वाले कुल ड्रग्स में पाकिस्तान का कितना हिस्सा है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। सवालः नशे से आतंकवाद को कैसे फायदा होता है? जवाबः ड्रग्स बेचकर मिलने वाले पैसे से आतंकी संगठन हथियार खरीदते हैं, नए लोगों को जोड़ते हैं और अपने नेटवर्क को चलाते हैं। इसलिए सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी मानती है। सवालः भारत तस्करों के निशाने पर क्यों है? जवाबः भारत दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध ड्रग्स उत्पादन क्षेत्रों गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान) और गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) के बीच स्थित है। इस भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर तस्कर भारत का इस्तेमाल ड्रग्स को दूसरे देशों तक पहुंचाने के रास्ते (ट्रांजिट रूट) और बड़े बाजार दोनों के रूप में करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि भारत ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क के निशाने पर रहता है। —————————- पीएम मोदी से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी बोले- जंतर-मंतर पर मुझे गालियां दीं, मेरी मां को अपशब्द कहे; ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, इन्हें माफ करना चाहता हूं पीएम मोदी ने शुक्रवार रात इंस्टाग्राम पर रील शेयर की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर कुछ शरारती बच्चों ने मुझे और मेरी मां को भद्दी-भद्दी गालियां दीं, लेकिन बचपन में गलतियां होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि बचपन गलतियों को सुधारने का अवसर भी होता है। ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, इन्हें माफ करना चाहता हूं। पूरी खबर पढ़ें…

मायावती ने भतीजे आकाश के ससुर को पार्टी से निकाला:कहा- बार-बार चेतावनी देने के बाद भी नहीं सुधरे, अब कभी वापस नहीं लेंगे

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर निकाल दिया है। उन्होंने रविवार को कहा- अशोक बार-बार चेतावनी देने के बाद भी नहीं सुधरे। अब इन्हें कभी पार्टी में वापस नहीं लेंगे। मायावती ने रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से बाहर कर दिया। बेनीवाल बसपा में कोऑर्डिनेटर के साथ ही पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। डेढ़ साल में यह दूसरा मौका है, जब मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला है। 12 फरवरी 2025 को गुटबाजी करने पर भी अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर किया था। हालांकि, छह महीने बाद सितंबर 2025 में उनकी दोबारा पार्टी में वापसी हो गई थी। अशोक सिद्धार्थ के पास तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बसपा की जिम्मेदारी थी। मायावती ने शनिवार को उनसे इन राज्यों का जिम्मा छीन लिया था। इसके बाद सोशल मीडिया में खबरें आईं कि अशोक सिद्धार्थ को यूपी का जिम्मा दिया जा सकता है। इससे भड़ककर रविवार को मायावती ने ‘X’ पर लिखा- बार-बार चेतावनी के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के रवैये में कोई सुधार नहीं आया। इस वजह से उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली गई थीं। बावजूद इसके उन्होंने यूपी लौटने की खबरें फैलाकर कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा करने की साजिश रची। इसीलिए अब उन्हें पार्टी से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। रामजी गौतम का कद बढ़ाया, कार्यकर्ताओं को सावधान रहने को कहा गुटबाजी और अनुशासनहीनता के लिए पहले भी निकाले गए इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- मायावती ने साफ किया था- उम्मीदवार तय करने का हक सिर्फ उनका 2 दिन पहले 31 जुलाई को मायावती ने साफ कर दिया था कि बसपा में टिकट तय करने का हक सिर्फ उनका है। आकाश आनंद या दूसरे नेता बस उनके कहने पर कार्यकर्ता सम्मेलन में उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करते हैं। इसी सिलसिले में आकाश 10 अगस्त को हाथरस जाकर बसपा प्रत्याशी का नाम घोषित करेंगे। मायावती ने आकाश आनंद को लेकर 2 अहम बातें साफ-साफ कही थीं- सरकारी नौकरी छोड़कर नेता बने अशोक सिद्धार्थ 5 जनवरी 1965 को जन्मे डॉ. अशोक सिद्धार्थ पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज से नेत्र रोग में डिप्लोमा किया। वह सरकारी सेवा के दौरान बामसेफ में विधानसभा, जिला और मंडल अध्यक्ष पदों पर रह चुके हैं। वह साल 2007 में कन्नौज के गुरसहायगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनाती के दौरान इस्तीफा देकर बसपा में शामिल हो गए थे। बसपा की ओर से वह पहली बार 2009 और दूसरी बार 2016 में एमएलसी रहे हैं। फिर 2016 में राज्यसभा भेजा गया। वह 2022 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। बसपा में कानपुर-आगरा जोनल कोऑर्डिनेटर जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रह चुके हैं। राष्ट्रीय सचिव पद के अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल सहित 5 राज्यों का प्रभार भी संभाला है। वहीं, डॉ. सिद्धार्थ की पत्नी सुनीता सिद्धार्थ साल 2007 से लेकर 2012 तक यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। अशोक के बारे में दावा किया जाता है कि वह लो-प्रोफाइल रहने वालों में से हैं। वह पार्टी में पर्दे के पीछे रहते हुए काम करते रहे हैं। रणधीर सिंह बेनीवाल 1990 में बसपा में शामिल हुए थे रणधीर सिंह बेनीवाल सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं। जाट समुदाय से आते हैं। 1990 में बसपा में शामिल हुए थे। मायावती ने मार्च 2025 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया था।
चार दिन पहले मायावती ने उन्हें हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के प्रभार से हटा दिया था। फिर एक दिन पहले उन्हें दोबारा रामजी गौतम के साथ पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी सौंप दी थी। ———————— ये खबर भी पढ़िए- UP चुनाव में 5 राज्यों की 12 पार्टियां लड़ेंगी:ओवैसी, चंद्रशेखर और पल्लवी बिगाड़ेंगे समीकरण; क्या है छोटे दलों का ‘सियासी गणित’ 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में 5 राज्यों की 12 क्षेत्रीय पार्टियां उतरने की तैयारी कर रही हैं। बिहार की JDU, लोजपा और VIP से लेकर महाराष्ट्र की शिवसेना (UBT) और NCP (शरद गुट) तक यूपी में अपनी किस्मत आजमाना चाहती हैं। पूरी खबर पढ़िए

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में तोड़फोड़ करने वाला था संदिग्ध जैश आतंकी:बंगाल STF का दावा- पुलिस की वर्दी पहनकर घुसने वाला था; गर्लफ्रेंड भी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल STF ने दावा किया है कि बर्धमान जिले से गिरफ्तार संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद ऑपरेटिव हमीम मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में तोड़-फोड़ की साजिश रची थी। STF के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स ने हमीम को CJP के छात्र प्रदर्शन में पुलिस की वर्दी पहनकर घुसने और वहां अशांति फैलाने का निर्देश दिया था। STF के IG गौरव शर्मा के मुताबिक, हमीम को बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की गतिविधियों पर नजर रखने और उनकी सुरक्षा से जुड़ी जानकारी जुटाने का भी काम सौंपा गया था। हमीम को दो दिन पहले पूर्व बर्धमान से गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उसे 14 दिन की STF हिरासत में भेज दिया है। STF ने हमीम की गर्लफ्रेंड अर्पिता सरकार को भी झारखंड से गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि दोनों पाकिस्तान से जुड़े शाहजाद भट्टी गैंग के इशारे पर काम कर रहे थे। राज्य मंत्री के बेटे को हनी ट्रैप में फंसा रही थी अर्पिता हमीम और उसकी गर्लफ्रेंड पर बंगाल के राज्य मंत्री उमेश राय के बेटे को हनीट्रैप कर अगवा करने और परिवार से वसूली की साजिश रचने का भी आरोप है। STF के मुताबिक, अर्पिता कई नेताओं और अन्य चर्चित लोगों से हनीट्रैप के जरिए जानकारी जुटाकर हमीम तक पहुंचाती थी। उसके वॉट्सऐप चैट से पाकिस्तान से जुड़े संपर्कों के संकेत मिले हैं। STF के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जांच में पता चला है कि यह साजिश पाकिस्तान के हैंडलर्स ने रचाई थी। हर आरोपी की भूमिका, इसमें और कितने लोग शामिल थे, इसकी जांच कर रहे हैं। सोशल मीडिया से कट्टरपंथी बना हमीम, विदेशी SIM भी मिले, STF के 5 दावे… बंगाल CM की गतिविधियों पर नजर रख रहा था STF के मुताबिक 23 साल का हमीम हावड़ा में काम करता था। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले वह बर्धमान चला गया था, जहां उसने अपार्टमेंट किराए पर लिया। जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए वह पिछले दो-तीन महीनों से छिपा हुआ था। हमीम एक साल पहले सोशल मीडिया के जरिए आतंकवादी संगठन के उस मॉड्यूल से जुड़ा, जिसे गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुज्जर चलाते थे। हमीम को पाकिस्तानी हैंडलर्स ने CM की गतिविधियों पर नजर रखने का काम सौंपा था। उसे उन जगहों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए कहा गया था जहां मुख्यमंत्री बिना सुरक्षा के रह सकते हैं। राज्यमंत्री की शिकायत के बाद जुड़े टेरर मॉड्यूल के तार STF ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि मॉड्यूल की जांच तब शुरू हुई जब सरकार के मंत्री से पैसे ऐंठने और हनी-ट्रैप का इस्तेमाल करके उनके बेटे को किडनैप करने की साजिश के बारे में इनपुट मिले। अधिकारी के मुताबिक जांच में सामने आया कि इसके पीछे एक ऑर्गनाइजेशन का हाथ है। इससे साहिबगंज के एक सोशल मीडिया हैंडल का पता चला, जिसे अर्पिता सरकार नाम की एक लड़की ऑपरेट कर रही थी। सोशल मीडिया अकाउंट की जांच से ऑफिसर्स को मंडल का पता चला। ——————————– आतंकी हमले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… कश्मीर में छत्तीसगढ़ के हिंदू मजदूरों की नाम पूछकर हत्या: लश्कर आतंकी लतीफ पर शक दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में 2 हिंदू मजदूरों की हत्या आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकियों ने की है। यह जानकारी खुफिया सूत्रों ने दी है। ये फ्रंट लश्कर ए तैयबा से जुड़ा है। सूत्रों ने बताया कि इस वारदात को अंजाम आतंकी मोहम्मद लतीफ ने दिया है। शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे कुलगाम के केलाम में आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे 2 हिंदू मजदूरों को नाम पूछकर गोली मार दी। पुलिस को यह जानकारी मौके पर मौजूद दूसरे मजदूरों ने दी। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे। पढ़ें पूरी खबर…